चमोली टनल हादसा: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश, मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख मुआवजे का ऐलान
चमोली टनल हादसे पर CM पुष्कर सिंह धामी ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए और मृत श्रमिकों के परिजनों को ₹4 लाख मुआवजे का ऐलान किया।
उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से ₹4 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
यह हादसा विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से जुड़ी THDC की निर्माणाधीन टनल में हुआ, जहां मलबा और पानी घुसने के बाद कई श्रमिक अंदर फंस गए। घटना के बाद कई एजेंसियों ने मिलकर बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
टनल में फंसे 22 श्रमिकों को निकालने के लिए रेस्क्यू जारी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि टनल के अंदर फंसे 22 लोगों में से 19 को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका था, जबकि बाकी लोगों को निकालने के प्रयास जारी थे। रेस्क्यू किए गए घायल श्रमिकों को उपचार के लिए जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया गया।
धामी ने कहा कि सरकार के लिए प्रत्येक जीवन बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यदि किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया।
CM पुष्कर सिंह धामी ने घटनास्थल और अस्पताल का किया दौरा
हादसे की जानकारी लेने के लिए मुख्यमंत्री ने पीपलकोटी के मायापुर स्थित घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने मौके पर चल रहे राहत एवं बचाव अभियान की समीक्षा की और अधिकारियों से ताजा जानकारी ली।
इसके बाद CM पुष्कर सिंह धामी जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचे, जहां उन्होंने हादसे में घायल श्रमिकों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग की टीमों से घायलों के इलाज और उनकी स्थिति की जानकारी भी ली।
हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत
प्रशासन के अनुसार, हादसे में अब तक 7 श्रमिकों की मौत हो चुकी है। रेस्क्यू किए गए घायल श्रमिकों का जिला अस्पताल में इलाज किया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग की टीमें उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं।
मलबा और पानी टनल के भीतर पहुंचने के बाद श्रमिकों के फंसने की सूचना मिली थी, जिसके बाद बचाव कार्य में विभिन्न एजेंसियों को लगाया गया।
Badrinath MLA ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
हादसे के बाद बद्रीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने टनल निर्माण स्थल पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने निर्माण कार्य में कथित लापरवाही और अनियमितताओं की जांच की मांग की।
बुटोला ने कहा कि हादसे के दौरान सबसे पहली प्राथमिकता टनल में फंसे लोगों की जान बचाना थी। उनके मुताबिक, बचाव दल लगातार श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए काम कर रहे थे।
पुष्कर सिंह धामी ने यह भी कहा कि प्रभावित श्रमिकों में बड़ी संख्या उत्तराखंड से बाहर के राज्यों के लोगों की है और उन्होंने संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी बातचीत की है।
मृतकों के परिजनों को ₹50 लाख और घायलों को ₹20 लाख देने की मांग
बद्रीनाथ विधायक ने सरकार से घोषित मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को ₹50 लाख और घायलों को ₹20 लाख की आर्थिक सहायता देने का आग्रह किया।
बुटोला ने कहा कि इस हादसे से प्रभावित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
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टनल की वेंटिलेशन व्यवस्था पर भी उठे सवाल
बुटोला ने टनल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि टनल में हवा के पर्याप्त प्रवाह के लिए इस्तेमाल होने वाला एयर-इनटेक या वेंटिलेशन सिस्टम ठीक तरीके से जुड़ा नहीं था।
उन्होंने टनल में पानी घुसने के स्रोत को लेकर भी सवाल उठाए। विधायक के अनुसार, जिस स्थान से पानी अंदर आया, उसे पहले संवेदनशील क्षेत्र के तौर पर चिन्हित किया गया था। इसके बावजूद वहां काम कर रहे लोगों के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होने पर सवाल खड़े होते हैं।
पिछले साल की घटना का भी किया जिक्र
बुटोला ने दावा किया कि पिछले साल भी इसी तरह की एक घटना हुई थी, जिसमें सैकड़ों लोग बाल-बाल बच गए थे। उन्होंने कहा कि दोबारा ऐसी घटना सामने आने से निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों और व्यवस्थाओं की गंभीर समीक्षा की जरूरत है।
विधायक ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान इन मुद्दों को उठाते हुए मजिस्ट्रियल जांच की मांग की। उनके अनुसार, CM धामी ने जांच कराने और घायल श्रमिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
जांच में सामने आएगा हादसे का कारण
अब मजिस्ट्रियल जांच में टनल हादसे की परिस्थितियों, सुरक्षा इंतजामों और सामने लगाए गए लापरवाही के आरोपों की पड़ताल की जाएगी। जांच के दौरान यदि किसी स्तर पर लापरवाही या सुरक्षा मानकों में कमी साबित होती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल प्रशासन का मुख्य फोकस रेस्क्यू ऑपरेशन, घायलों के इलाज और टनल में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है।
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