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संसद में पहली बार वंदे मातरम् से शुरू हुई लोकसभा की कार्यवाही, हंगामे के बीच मानसून सत्र का समापन

संसद के मानसून सत्र का समापन वंदे मातरम् के साथ हुआ। लोकसभा में पीएम मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी समेत कई सांसद मौजूद रहे।

संसद का मानसून सत्र गुरुवार, 13 अगस्त को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव के बीच समाप्त हो गया। सत्र के अंतिम दिन लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत पहली बार वंदे मातरम् की छह पंक्तियों के साथ हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई सांसद सदन में मौजूद रहे।

वंदे मातरम् के गायन के बाद लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही का भी राष्ट्रगीत के साथ समापन हुआ। इस तरह संसद के दोनों सदनों में वंदे मातरम् के साथ मानसून सत्र का औपचारिक अंत हुआ।

पहली बार वंदे मातरम् से शुरू हुई लोकसभा की कार्यवाही

लोकसभा में वंदे मातरम् के साथ कार्यवाही की शुरुआत को सत्र की सबसे अहम घटनाओं में से एक माना गया। राष्ट्रगीत की छह पंक्तियां बजाए जाने के दौरान सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राहुल गांधी सहित विभिन्न दलों के सांसद मौजूद थे।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब वंदे मातरम् के आधिकारिक इस्तेमाल और इससे जुड़े नियमों को लेकर चर्चा तेज है। सरकार की ओर से विभिन्न औपचारिक अवसरों पर राष्ट्रगीत के इस्तेमाल को लेकर प्रोटोकॉल निर्धारित किए गए हैं।

वंदे मातरम् को लेकर क्यों हो रही चर्चा?

वंदे मातरम् के गायन और आधिकारिक कार्यक्रमों में इसके इस्तेमाल को लेकर हाल में कई महत्वपूर्ण प्रावधान चर्चा में रहे हैं। सरकारी निर्देशों में राष्ट्रपति के आगमन, तिरंगा फहराने और राज्यपालों के संबोधन जैसे अवसरों पर राष्ट्रगीत की निर्धारित पंक्तियों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों का उल्लेख किया गया है।

राष्ट्रगीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसे रोकने से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी राजनीतिक और कानूनी स्तर पर चर्चा हुई है। ऐसे में संसद की कार्यवाही की शुरुआत वंदे मातरम् से होना खास तौर पर चर्चा का विषय बन गया।

पूरे सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

मानसून सत्र के दौरान संसद में कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने छात्रों से जुड़े मुद्दों, कथित पुलिस कार्रवाई और अन्य राजनीतिक मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

कई मौकों पर विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और विरोध के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह समेत सत्ता पक्ष के नेताओं ने विपक्ष के आरोपों पर चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही।

आखिरी दिन भी संसद परिसर में दिखा विरोध

सत्र के अंतिम दिन भी राजनीतिक विरोध का सिलसिला जारी रहा। संसद परिसर के मकर द्वार के पास भाजपा और विपक्षी दलों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया।

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भाजपा ने राहुल गांधी और कांग्रेस को निशाना बनाते हुए कुछ राजनीतिक मुद्दे उठाए, जबकि विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ अपने मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया। इसका असर सदन के अंतिम दिन के माहौल पर भी दिखाई दिया।

लोकसभा अध्यक्ष का विदाई संबोधन भी नहीं हुआ

मानसून सत्र के समापन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का पारंपरिक विदाई संबोधन भी नहीं हुआ। आम तौर पर सत्र के अंतिम दिन अध्यक्ष सदन के कामकाज, उत्पादकता और प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए समापन संबोधन देते हैं।

हालांकि, इस बार सदन में बने राजनीतिक तनाव और विरोध के बीच यह परंपरागत प्रक्रिया नहीं हो सकी।

आगे भी जारी रह सकती है सियासी गर्मी

मानसून सत्र का समापन वंदे मातरम् के साथ हुआ, लेकिन इसके साथ ही संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद भी स्पष्ट दिखाई दिए। एक ओर लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत राष्ट्रगीत की छह पंक्तियों से होना ऐतिहासिक घटनाक्रम रहा, वहीं दूसरी ओर पूरा सत्र विरोध, नारेबाजी और राजनीतिक बहस के लिए भी चर्चा में रहा।

आने वाले सत्र में भी सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव जारी रहने की संभावना है। संसद में वंदे मातरम् के औपचारिक इस्तेमाल और इससे जुड़े नियम भी आने वाले समय में राजनीतिक बहस का विषय बन सकते हैं।

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