हरियाणा बाल देखभाल संस्थान से गरीब, अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा, भोजन व सुरक्षित माहौल देने की तैयारी, कई जिलों में नए संस्थान खुलेंगे।
हरियाणा बाल देखभाल संस्थान: हरियाणा में आर्थिक रूप से कमजोर, अनाथ और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों की शिक्षा को लेकर सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने उन जिलों में नए बाल देखभाल संस्थान खोलने का प्रस्ताव तैयार किया है, जहां फिलहाल ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों को उनके नजदीकी क्षेत्र में ही सुरक्षित माहौल, शिक्षा और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
10 से 12 जिलों में नहीं है संस्थान
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अनुसार हरियाणा के करीब 10 से 12 जिलों में अभी बाल देखभाल संस्थान उपलब्ध नहीं हैं। इन जिलों के बच्चों को जरूरत पड़ने पर दूसरे जिलों में मौजूद संस्थानों में भेजना पड़ता है। इससे बच्चों और उनके परिवारों को दूरी समेत कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने बताया कि उनके संज्ञान में आया है कि प्रदेश के कई जिलों में अभी यह सुविधा मौजूद नहीं है। उन्होंने बताया कि सिरसा, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, कैथल, फतेहाबाद और झज्जर में बाल देखभाल संस्थान नहीं होने की स्थिति सामने आई है।
सरकार को भेजा जाएगा प्रस्ताव
आयोग ने ऐसे जिलों में संस्थान शुरू करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव में जरूरी तकनीकी पहलुओं और संबंधित सुझावों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद इसे सरकार के पास भेजने की तैयारी है।
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो हरियाणा बाल देखभाल संस्थान का दायरा बढ़ेगा और अधिक जिलों के बच्चों को स्थानीय स्तर पर सहायता मिल सकेगी। इससे जरूरतमंद बच्चों को दूसरे जिलों में भेजने की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
किन बच्चों को मिल सकती है मदद?
बाल देखभाल संस्थानों में ऐसे बच्चों को सहायता देने का प्रावधान है, जिनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं या जो पर्याप्त देखभाल से वंचित हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के माता-पिता, जो अपने बच्चों की पढ़ाई और जरूरी खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं, नियमों के तहत संस्थान में बच्चों को रखने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इसके अलावा अनाथ बच्चों और ऐसे बच्चों को भी संस्थागत संरक्षण दिया जा सकता है, जिन्हें परिवार की पर्याप्त देखभाल नहीं मिल रही है। भीख मांगते हुए पाए जाने वाले बच्चों के पुनर्वास और संरक्षण के लिए भी संबंधित व्यवस्था के तहत सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
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रहने और पढ़ाई की सुविधा
नियमों के अनुसार पात्र बच्चों को बाल देखभाल संस्थान में रहने और भोजन जैसी जरूरी सुविधाएं मिलती हैं। बच्चों की शिक्षा को जारी रखने के लिए भी आवश्यक व्यवस्था की जाती है। इस तरह संस्थान जरूरतमंद बच्चों को केवल आश्रय देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी पढ़ाई और समग्र विकास में भी सहयोग करते हैं।
हरियाणा बाल देखभाल संस्थान के विस्तार का प्रस्ताव ऐसे बच्चों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें आर्थिक या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा जारी रखने में मुश्किल आती है। स्थानीय स्तर पर संस्थान उपलब्ध होने से बच्चों को सुरक्षित वातावरण के साथ पढ़ाई का अवसर भी मिल सकता है।
बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की कोशिश
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी बच्चे की आर्थिक स्थिति या पारिवारिक परिस्थिति उसकी शिक्षा के रास्ते में बाधा न बने। नए संस्थानों की स्थापना से ऐसे बच्चों को बेहतर देखभाल और शिक्षा से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आयोग की ओर से प्रस्ताव में जरूरी बदलाव और सुझाव शामिल करने के बाद इसे सरकार को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने पर संबंधित जिलों में संस्थान खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
हरियाणा बाल देखभाल संस्थान की संख्या और पहुंच बढ़ने से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के जरूरतमंद बच्चों को भी सुविधाओं का लाभ उनके आसपास मिल सकेगा। यह पहल गरीब, अनाथ और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके बेहतर भविष्य की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
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