स्वास्थ्य

आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों में क्या खाना चाहिए? जानिए ग्रीष्म ऋतु का बेस्ट डाइट प्लान और लाइफस्टाइल टिप्स

आयुर्वेद के अनुसार जानिए गर्मियों में क्या खाना चाहिए। ग्रीष्म ऋतु में पित्त को शांत रखने और बीमारियों से बचने का बेस्ट डाइट प्लान।

उत्तर भारत सहित देश के कई हिस्सों में चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी का प्रकोप शुरू हो चुका है। आयुर्वेद में इस मौसम को ‘ग्रीष्म ऋतु’ कहा जाता है। इस दौरान सूर्य की तेज किरणें शरीर की ऊर्जा और नमी को सोख लेती हैं, जिससे डिहाइड्रेशन, कमजोरी और सुस्ती जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, इस मौसम में शरीर में ‘पित्त दोष’ बढ़ जाता है, जिससे पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि गर्मियों में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।

ऋतुचर्या (मौसम के अनुकूल जीवनशैली) का पालन करके आप न केवल बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि पूरे सीजन ऊर्जावान भी रह सकते हैं। आइए जानते हैं आयुर्वेद के अनुसार ग्रीष्म ऋतु का सबसे बेहतरीन डाइट प्लान।

1. गर्मियों में कैसा होना चाहिए आपका भोजन?

आयुर्वेद के मुताबिक, इस मौसम में हमारी जठराग्नि (पाचन तंत्र की अग्नि) मंद हो जाती है। इसलिए भारी या गरिष्ठ भोजन करने से शरीर के अंदर गर्मी और एसिडिटी बढ़ सकती है। इस मौसम में हमेशा हल्का, सुपाच्य और प्राकृतिक रूप से ठंडा भोजन करने की सलाह दी जाती है। अगर आप इस बात पर ध्यान दें कि गर्मियों में क्या खाना चाहिए, तो आपका पाचन तंत्र मजबूत रहेगा और रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) भी बढ़ेगी।

2. आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों में क्या खाएं? (Best Summer Diet)

शरीर को भीतर से ठंडा रखने और पित्त को शांत करने के लिए अपनी दैनिक डाइट में निम्नलिखित चीजों को जरूर शामिल करें:

रसीले और मौसमी फल: गर्मियों के फलों में पानी की मात्रा सबसे अधिक होती है। इस मौसम में तरबूज, खरबूजा, पका हुआ आम, खीरा, अनार और नारियल पानी का सेवन सबसे अच्छा माना जाता है। ये फल शरीर को जरूरी विटामिंस देने के साथ-साथ हाइड्रेटेड रखते हैं।

प्राकृतिक ठंडक देने वाले पेय: बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स या पैक्ड जूस में सिर्फ शुगर और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। इसकी जगह घर पर बनी ताजी लस्सी, नींबू पानी, बेल का शरबत, आम पन्ना और सौंफ का पानी पिएं। पुदीना और भुने जीरे से बनी छाछ पेट के लिए अमृत समान है।

सुपाच्य और हल्का अनाज: मुख्य भोजन में खिचड़ी, चावल, मूंग की दाल और हल्की पकी हुई हरी सब्जियों को प्राथमिकता दें। भोजन बनाते समय धनिया, सौंफ, पुदीना और इलायची जैसे ठंडे मसालों का प्रयोग करें।

सीमित मात्रा में घी: आयुर्वेद में गाय के शुद्ध देसी घी को पित्त शामक माना गया है। गर्मियों में सीमित मात्रा में घी का सेवन करने से शरीर की अत्यधिक गर्मी कम होती है और आंतरिक ताकत बनी रहती है।

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3. ग्रीष्म ऋतु में किन चीजों से परहेज करें?

यह जानने के साथ-साथ कि गर्मियों में क्या खाना चाहिए, यह जानना भी उतना ही जरूरी है कि इस मौसम में क्या नहीं खाना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार, निम्नलिखित खाद्य पदार्थ शरीर में गर्मी और एसिडिटी को बढ़ाते हैं:

अत्यधिक मसालेदार, तीखा और तेल-घी में तला हुआ खाना।

फास्ट फूड, समोसे, और कचौड़ी जैसे भारी स्नैक्स।

चाय, कॉफी और शराब का अत्यधिक सेवन, क्योंकि ये शरीर को डिहाइड्रेट करते हैं।

बहुत ज्यादा नमक, खट्टे और फर्मेंटेड (खमीर उठे हुए) खाद्य पदार्थ।

4. स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेदिक लाइफस्टाइल टिप्स

सिर्फ सही खान-पान ही नहीं, बल्कि एक संतुलित जीवनशैली अपनाकर भी आप गर्मी के दुष्प्रभावों से बच सकते हैं।

धूप से बचाव: दोपहर की तेज धूप में सीधे बाहर निकलने से बचें। अगर निकलना जरूरी हो, तो सिर और चेहरे को सूती कपड़े से ढकें।

सही पोशाक: शरीर को ठंडा रखने के लिए ढीले और हल्के रंग के सूती (कॉटन) कपड़े पहनें।

पर्याप्त नींद और योग: रात में पूरी नींद लें। मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखने के लिए रोजाना सुबह योग और ध्यान (मेडिटेशन) का अभ्यास करें।

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