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महिलाओं में माइग्रेन: पुरुषों से ज्यादा क्यों होता है सिरदर्द? डॉक्टर से जानें कारण और ट्रिगर

महिलाओं में माइग्रेन पुरुषों से ज्यादा क्यों होता है? डॉक्टर से जानें हार्मोनल बदलाव, नींद, तनाव, पानी की कमी और अन्य संभावित कारण।

महिलाओं में माइग्रेन की समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखने को मिलती है। अक्सर लोग इसे सामान्य सिरदर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन माइग्रेन का दर्द कई बार इतना परेशान करने वाला हो सकता है कि रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं। सिरदर्द के साथ मतली या उल्टी, तेज रोशनी और आवाज से परेशानी, थकान और ध्यान लगाने में कठिनाई जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

वरिष्ठ सलाहकार न्यूरोलॉजिस्ट और मूवमेंट डिसऑर्डर विशेषज्ञ डॉ. नेहा पंडिता के अनुसार, महिलाओं में माइग्रेन के पीछे हार्मोनल बदलाव अहम भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन यही इसका एकमात्र कारण नहीं है। नींद की कमी, तनाव, समय पर खाना न खाना और पर्याप्त पानी न पीना भी संवेदनशील लोगों में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं।

हार्मोनल बदलाव से बदल सकता है माइग्रेन का पैटर्न

महिलाओं के जीवन में कई ऐसे चरण आते हैं, जब शरीर में हार्मोन का स्तर बदलता है। पीरियड्स, गर्भावस्था, बच्चे के जन्म के बाद का समय और रजोनिवृत्ति जैसे चरणों में माइग्रेन के दौरे के पैटर्न में बदलाव देखा जा सकता है।

डॉ. पंडिता के मुताबिक, केवल दर्द की तीव्रता पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि सिरदर्द कब शुरू होता है, कितनी देर रहता है और किन परिस्थितियों में बार-बार सामने आता है।

पीरियड्स के आसपास क्यों बढ़ सकता है सिरदर्द?

कुछ महिलाओं में मासिक धर्म शुरू होने से पहले या उसके आसपास माइग्रेन का दौरा पड़ सकता है। इसके पीछे पीरियड्स से पहले होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव, खासकर एस्ट्रोजन के स्तर में बदलाव, एक संभावित कारण माना जाता है।

कुछ मामलों में मासिक धर्म से जुड़ा माइग्रेन अधिक लंबे समय तक रह सकता है या इसे नियंत्रित करना अपेक्षाकृत मुश्किल हो सकता है। हालांकि, हर महिला में इसका अनुभव एक जैसा नहीं होता।

सिर्फ हार्मोन नहीं, ये आदतें भी बढ़ा सकती हैं परेशानी

महिलाओं में माइग्रेन का संबंध केवल हार्मोन से जोड़ना सही नहीं होगा। जीवनशैली से जुड़े कई कारक भी सिरदर्द को बढ़ा सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • पर्याप्त नींद न लेना
  • लंबे समय तक भूखे रहना या भोजन छोड़ देना
  • शरीर में पानी की कमी
  • लगातार तनाव में रहना
  • दिनचर्या में अचानक बदलाव
  • अत्यधिक व्यस्तता और आराम की कमी

काम, परिवार और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच लगातार भागदौड़ करने वाले लोगों में ये कारक माइग्रेन के ट्रिगर बन सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में ट्रिगर अलग हो सकते हैं।

सिरदर्द की डायरी रखने से मिल सकती है मदद

बार-बार माइग्रेन होने पर सिरदर्द की डायरी बनाना उपयोगी हो सकता है। इसमें सिरदर्द की तारीख और अवधि के साथ पीरियड साइकल, नींद, भोजन, पानी का सेवन, तनाव और दिनचर्या में हुए बदलाव दर्ज किए जा सकते हैं।

समय के साथ इन जानकारियों को देखने पर यह समझने में मदद मिल सकती है कि सिरदर्द किन परिस्थितियों में अधिक होता है। इससे डॉक्टर को भी समस्या के पैटर्न को समझने में मदद मिल सकती है।

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गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति में बदल सकती है स्थिति

महिलाओं में माइग्रेन का अनुभव जीवन के अलग-अलग चरणों में बदल सकता है। गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को माइग्रेन में राहत मिल सकती है, जबकि कुछ में सिरदर्द जारी रह सकता है।

बच्चे के जन्म के बाद नींद पूरी न होना, हार्मोनल बदलाव और नवजात की देखभाल जैसी जिम्मेदारियां माइग्रेन को संभालना कठिन बना सकती हैं। इसी तरह रजोनिवृत्ति के आसपास भी कुछ महिलाओं में माइग्रेन बढ़ सकता है, जबकि कुछ को इस दौरान राहत महसूस हो सकती है।

इसलिए ऐसा कोई एक पैटर्न नहीं है जो हर महिला पर लागू हो।

हर सिरदर्द माइग्रेन नहीं होता

महिलाओं में माइग्रेन आम हो सकता है, लेकिन हर बार होने वाला सिरदर्द माइग्रेन हो, यह जरूरी नहीं है। अगर सिरदर्द बार-बार हो रहा है और काम, नींद या रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर डाल रहा है, तो इसे सामान्य मानकर लगातार नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

खास तौर पर अगर सिरदर्द अचानक बहुत तेज हो और इसके साथ शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बोलने में परेशानी, देखने में बदलाव, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

बार-बार होने वाले या बदलते हुए सिरदर्द का सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना बेहतर है। महिलाओं में माइग्रेन के कारण और ट्रिगर व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकते हैं, इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी दवा को नियमित रूप से लेना उचित नहीं है।

कुल मिलाकर, हार्मोनल बदलाव माइग्रेन का एक महत्वपूर्ण कारक हो सकते हैं, लेकिन नींद, तनाव, भोजन और पानी की कमी जैसे जीवनशैली से जुड़े कारणों पर भी ध्यान देना जरूरी है। सिरदर्द के पैटर्न को समझना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना इसकी बेहतर देखभाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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