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उत्तराखंड पर्वतीय चकबंदी नीति: किसानों के हित में धामी सरकार का ऐतिहासिक निर्णय

उत्तराखंड में 11 पर्वतीय जिलों में चकबंदी नीति लागू, किसानों को राहत, खेती आसान होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में राज्य सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों की वर्षों पुरानी मांग को ध्यान में रखते हुए 11 पर्वतीय जिलों में स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय को ग्रामीण विकास और कृषि सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

पर्वतीय चकबंदी नीति से कृषि संरचना में बड़ा बदलाव

राज्य सरकार द्वारा लागू की जा रही उत्तराखंड पर्वतीय चकबंदी नीति का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में बिखरे हुए छोटे-छोटे खेतों को एकीकृत कर कृषि को अधिक व्यावहारिक और लाभकारी बनाना है। इस उत्तराखंड पर्वतीय चकबंदी नीति से किसानों को खेती करने में आसानी होगी और उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होगी।

किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी

पर्वतीय क्षेत्रों में खेतों का बिखराव हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने उत्तराखंड पर्वतीय चकबंदी नीति को लागू करने का निर्णय लिया है। इस नीति से न केवल भूमि का बेहतर उपयोग होगा बल्कि कृषि लागत भी कम होगी।

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल

इस उत्तराखंड पर्वतीय चकबंदी नीति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। खेतों के एकीकरण से कृषि मशीनरी का उपयोग आसान होगा, सिंचाई व्यवस्था बेहतर होगी और किसानों की आय में भी सुधार होगा। सरकार का मानना है कि यह नीति पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन रोकने में भी मदद करेगी।

आधुनिक कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

सरकार का उद्देश्य है कि पहाड़ी क्षेत्रों में आधुनिक और टिकाऊ कृषि मॉडल विकसित किया जाए। इसी दृष्टि से उत्तराखंड पर्वतीय चकबंदी नीति को लागू किया गया है, जिससे भूमि उपयोग में दक्षता आएगी और कृषि गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।

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