स्वाइन फ्लू के लक्षण: क्या हर बुखार में स्वाइन फ्लू टेस्ट जरूरी है? इंदौर में महिला की मौत के बाद बढ़ी चिंता, जानें कब कराएं जांच
स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच जानें क्या हर बुखार में स्वाइन फ्लू टेस्ट जरूरी है, स्वाइन फ्लू के लक्षण, बचाव और जांच से जुड़ी अहम जानकारी।
स्वाइन फ्लू के लक्षण: देश के कई हिस्सों में इन्फ्लुएंजा एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बीच लोगों की चिंता बढ़ गई है। दिल्ली में इस साल एच1एन1 के मामलों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि बेंगलुरु के क्लेरेंस हाई स्कूल में 500 से ज्यादा छात्र और 21 स्टाफ सदस्य फ्लू जैसे लक्षणों से बीमार पड़े। स्कूल में एच1एन1 के दो मामलों की भी पुष्टि हुई थी।
ऐसे माहौल में सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्वाइन फ्लू टेस्ट क्या हर व्यक्ति को बुखार होने पर कराना चाहिए? इसका जवाब है—नहीं। हर बुखार का मतलब एच1एन1 संक्रमण नहीं होता और जांच की जरूरत मरीज के लक्षणों, उनकी गंभीरता, संक्रमण के संपर्क और जोखिम कारकों को देखकर तय की जाती है।
स्वाइन फ्लू के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
एच1एन1 अब मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा है। भारत में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र मौसमी इन्फ्लुएंजा के लिए एच1एन1 से जुड़ी तकनीकी गाइडलाइन, जांच और मरीजों की श्रेणीकरण संबंधी दिशा-निर्देश उपलब्ध कराता है।
बारिश, नमी और मौसम में बदलाव के दौरान फ्लू जैसे संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं। इसी वजह से मानसून के दौरान बुखार, खांसी और सांस से जुड़ी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ना चिंता का विषय बन जाता है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली में इस साल एच1एन1 के मामले पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग छह गुना बढ़े हैं।
बेंगलुरु के स्कूल में 500 से ज्यादा छात्र बीमार
बेंगलुरु के क्लेरेंस हाई स्कूल में 500 से अधिक छात्रों और 21 स्टाफ सदस्यों में बुखार, सर्दी, खांसी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण सामने आए। स्वास्थ्य संबंधी चिंता बढ़ने के बाद स्कूल में ऑफलाइन कक्षाएं अस्थायी रूप से निलंबित की गईं। दो एच1एन1 मामलों की पुष्टि भी हुई थी।
यह घटना बताती है कि स्कूल, कार्यालय और अन्य भीड़भाड़ वाली जगहों पर संक्रमण से बचाव के लिए सावधानी रखना जरूरी है। हालांकि, केवल बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी मरीज स्वाइन फ्लू से संक्रमित हैं।
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स्वाइन फ्लू के लक्षण कैसे पहचानें?
स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू से काफी मिलते-जुलते हो सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं—
- बुखार या ठंड लगना
- खांसी
- गले में खराश
- नाक बहना या बंद होना
- सिरदर्द
- शरीर में दर्द
- थकान और कमजोरी
कुछ मरीजों में उल्टी या दस्त जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं, खासकर बच्चों में। लक्षणों की गंभीरता व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
क्या हर बुखार में स्वाइन फ्लू टेस्ट करवाना चाहिए?
स्वाइन फ्लू टेस्ट हर बुखार में जरूरी नहीं होता। सामान्य वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रमणों में भी बुखार आ सकता है। इसलिए केवल तापमान बढ़ने के आधार पर एच1एन1 की पुष्टि नहीं की जा सकती।
अगर बुखार हल्का है और मरीज को केवल सामान्य सर्दी-खांसी जैसी शिकायत है, तो डॉक्टर लक्षणों और मरीज की स्थिति के आधार पर आगे की जांच तय कर सकते हैं। दूसरी ओर, तेज या लगातार बढ़ता बुखार, सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन स्तर में गिरावट या हालत बिगड़ने जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी है। चिकित्सकीय सलाह के बाद स्वाइन फ्लू टेस्ट या अन्य जांच कराने का निर्णय लिया जा सकता है।
एच1एन1 की जांच कैसे होती है?
एच1एन1 की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच की जाती है। मरीज की स्थिति और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के आधार पर डॉक्टर उचित जांच की सलाह देते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य दिशानिर्देशों में इन्फ्लुएंजा वायरस की पहचान के लिए प्रयोगशाला जांच की व्यवस्था और नमूना संग्रह से जुड़े प्रोटोकॉल दिए गए हैं।
इसलिए खुद से टेस्ट कराने या दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
इन्फ्लुएंजा संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन कुछ समूहों में गंभीर बीमारी का जोखिम अधिक रहता है। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से फेफड़े, हृदय या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग शामिल हो सकते हैं। कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
ऐसे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
स्वाइन फ्लू से बचने के लिए क्या करें?
संक्रमण से बचने के लिए कुछ सामान्य सावधानियां बेहद महत्वपूर्ण हैं—
- खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक ढकें।
- हाथों को साबुन से नियमित रूप से साफ करें।
- फ्लू जैसे लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
- बीमार होने पर स्कूल या कार्यालय जाने से बचें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवा न लें।
- आसपास की सतहों और इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की साफ-सफाई रखें।
- गंभीर लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
क्या यह कोरोना जैसी नई महामारी है?
फिलहाल एच1एन1 को कोरोना जैसी नई महामारी समझना सही नहीं है। 2009 में एच1एन1 महामारी के रूप में सामने आया था, लेकिन बाद में यह मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा बन गया। केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों की मौजूदा जानकारी भी एच1एन1 को मौसमी इन्फ्लुएंजा के संदर्भ में रखती है।
हालांकि, मामलों में वृद्धि को देखते हुए लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। खासकर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में फ्लू के लक्षण गंभीर हो सकते हैं।
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