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गणेश चतुर्थी 2026 पर कब निकलेगा चांद? इस समय भूलकर भी न करें चंद्र दर्शन, जानें कलंक से बचने के उपाय

गणेश चतुर्थी 2026 पर चंद्र दर्शन वर्जित माना जाता है। जानें 14 सितंबर को चंद्रोदय-चंद्रास्त का समय और गलती से चांद दिखने पर उपाय।

गणेश चतुर्थी 2026 का पावन पर्व आज यानी 14 सितंबर को देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं और घरों में गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं। हालांकि, हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना शुभ नहीं माना जाता।

मान्यता है कि इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति पर मिथ्या कलंक लग सकता है। इसी वजह से भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को कई जगहों पर कलंक चतुर्थी या पत्थर चौथ भी कहा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी 2026 पर चंद्रमा के उदय और अस्त होने का समय क्या है और किस अवधि में चंद्र दर्शन से बचना चाहिए।

14 सितंबर 2026 को कब होगा चंद्रोदय?

14 सितंबर को चंद्रमा का उदय सुबह करीब 9:06 बजे बताया गया है, जबकि चंद्रास्त रात करीब 8:06 बजे होगा। हालांकि, चंद्रमा का आकाश में दिखाई देना स्थानीय परिस्थितियों और रोशनी के कारण अलग-अलग समय पर महसूस हो सकता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में चंद्र दर्शन से बचने की सलाह दी जाती है।

शहर के अनुसार चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

अलग-अलग शहरों में चंद्रमा के उदय और अस्त होने के समय में कुछ अंतर रहेगा। प्रमुख शहरों के लिए समय इस प्रकार बताया गया है:

नई दिल्ली: सुबह 9:06 बजे से रात 8:04 बजे तक
नोएडा: सुबह 9:01 बजे से रात 8:08 बजे तक
पटना: सुबह 8:24 बजे से शाम 7:41 बजे तक
लखनऊ: सुबह 8:44 बजे से शाम 7:56 बजे तक
मुंबई: सुबह 9:07 बजे से रात 8:41 बजे तक
जम्मू: सुबह 9:18 बजे से रात 8:11 बजे तक
जयपुर: सुबह 9:05 बजे से रात 8:17 बजे तक
चंडीगढ़: सुबह 9:07 बजे से रात 8:06 बजे तक
वाराणसी: सुबह 8:33 बजे से शाम 7:50 बजे तक
कोटा: सुबह 9:02 बजे से रात 8:19 बजे तक
हैदराबाद: सुबह 8:41 बजे से रात 8:04 बजे तक
कोलकाता: सुबह 7:07 बजे से शाम 7:32 बजे तक
कानपुर: सुबह 8:45 बजे से शाम 7:59 बजे तक

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गणेश चतुर्थी 2026 पर किस समय चंद्र दर्शन न करें?

गणेश चतुर्थी 2026 पर धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्र दर्शन से बचने की अवधि सुबह 9:06 बजे से रात 8:04 बजे तक बताई गई है। इस दौरान चंद्रमा को देखने से मिथ्या दोष लगने की मान्यता है।

धार्मिक कथाओं में चंद्रमा और भगवान गणेश से जुड़ी एक घटना का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि चंद्रमा को देखने के कारण भगवान कृष्ण पर भी स्यमन्तक मणि चोरी करने का मिथ्या आरोप लगा था। इसी कथा से गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से जुड़ी मान्यता को जोड़ा जाता है।

गलती से चांद दिख जाए तो क्या करें?

अगर गणेश चतुर्थी 2026 के दिन भूलवश चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ उपाय किए जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने के साथ विशेष मंत्र का जाप करने की परंपरा है।

मंत्र इस प्रकार है:

“सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥”

मान्यता के अनुसार इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मिथ्या दोष से बचाव की कामना की जाती है।

पत्थर या कंकड़ फेंकने की भी है मान्यता

कुछ लोक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि अगर गणेश चतुर्थी के दिन गलती से चंद्रमा दिखाई दे जाए तो उसकी दिशा में एक छोटा कंकड़ या पत्थर फेंकने की परंपरा है। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा और स्तुति करने तथा स्यमन्तक मणि की कथा का पाठ करने की मान्यता है।

हालांकि, ये धार्मिक और लोक मान्यताओं पर आधारित उपाय हैं। गणेश चतुर्थी 2026 पर पूजा-पाठ और चंद्र दर्शन से जुड़े नियमों के लिए अपने क्षेत्र की परंपरा और स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।

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