धर्म

Lalbaugcha Raja: लालबागचा राजा को कौन-कौन सी चीजें चढ़ाई जाती हैं? जानें पूरी जानकारी

लालबागचा राजा को भक्त मन्नत पूरी होने पर सोने-चांदी की वस्तुएं, मोदक, नारियल, दूर्वा और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाते हैं। जानें पूरी जानकारी।

मुंबई के परेल इलाके में गणेशोत्सव के दौरान सजने वाला लालबागचा राजा देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के गणेश भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इन्हें प्यार से ‘नवसाचा गणपति’ भी कहा जाता है, यानी ऐसे गणपति जिनसे भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। आम भक्तों के साथ उद्योग जगत, राजनीति और फिल्मी दुनिया से जुड़े लोग भी बप्पा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।

लालबागचा राजा को क्या-क्या चढ़ाया जाता है?

दर्शन के दौरान श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अलग-अलग वस्तुएं भगवान गणेश को अर्पित करते हैं। सामान्य गणेश पूजा में दूर्वा, फूल, सिंदूर, अक्षत, नारियल, फल और मिठाई चढ़ाने की परंपरा है।

गणपति बप्पा को मोदक का भोग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। इसलिए बड़ी संख्या में भक्त मोदक और अन्य मिठाइयां अर्पित करते हैं। इसके अलावा नारियल और फल भी चढ़ाए जाते हैं।

हालांकि लालबागचा राजा के दरबार में चढ़ावे की खास बात यह है कि कई श्रद्धालु मन्नत पूरी होने के बाद सोने और चांदी से बनी वस्तुएं भी अर्पित करते हैं।

सोने-चांदी की चीजें भी करते हैं अर्पित

मन्नत पूरी होने के बाद भक्त अपनी क्षमता के अनुसार कीमती वस्तुएं बप्पा को अर्पित करते हैं। इनमें सोने या चांदी की चेन, अंगूठी, हार, मुकुट और अन्य धार्मिक वस्तुएं शामिल हो सकती हैं।

कुछ श्रद्धालु गणेश प्रतिमा, मूषक, गदा और मोदक जैसी आकृतियों वाली सोने-चांदी की वस्तुएं भी अर्पित करते हैं। सोने की दूर्वा और कान के कुंडल जैसे चढ़ावे भी भक्तों की श्रद्धा का हिस्सा रहे हैं।

इसी वजह से हर साल लालबागचा राजा को मिलने वाले सोने-चांदी के चढ़ावे की चर्चा होती है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर बप्पा के प्रति आभार जताने के लिए अपनी सामर्थ्य के मुताबिक चढ़ावा अर्पित करते हैं।

also read:- हरितालिका तीज 2026: जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, तिथि और…

मन्नत पूरी होने पर क्या चढ़ाते हैं भक्त?

लालबागचा राजा को मन्नतों का गणपति भी कहा जाता है। धार्मिक आस्था के अनुसार लोग संतान प्राप्ति, स्वास्थ्य, कारोबार और जीवन से जुड़ी अन्य मनोकामनाओं के लिए बप्पा से प्रार्थना करते हैं।

मनोकामना पूरी होने के बाद कई श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार सोने का मुकुट, सोने या चांदी की दूर्वा, मोदक, कुंडल और चेन जैसी वस्तुएं अर्पित करते हैं।

यह जरूरी नहीं कि हर भक्त महंगी वस्तु ही चढ़ाए। गणेश पूजा में श्रद्धा को प्रमुख माना जाता है और भक्त अपनी क्षमता के अनुसार फूल, दूर्वा, फल, नारियल, मिठाई या अन्य सामान्य पूजन सामग्री भी अर्पित कर सकते हैं।

चढ़ावे में मिले सोने-चांदी का क्या होता है?

लालबागचा राजा को अर्पित की गई सोने और चांदी की वस्तुओं को लेकर भी एक खास परंपरा बताई जाती है। गणेशोत्सव समाप्त होने के बाद मंडल इन वस्तुओं को वार्षिक नीलामी की प्रक्रिया में शामिल करता है।

नीलामी के जरिए इन वस्तुओं से प्राप्त धन का इस्तेमाल सामाजिक कार्यों और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए किया जाता है। इस तरह भक्तों की ओर से श्रद्धा के रूप में दिया गया चढ़ावा सामाजिक सेवा से भी जुड़ जाता है।

क्यों खास है लालबागचा राजा का दरबार?

मुंबई के लालबाग इलाके में स्थापित गणपति की यह प्रतिमा हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। लंबी कतारों के बावजूद भक्त बप्पा के दर्शन और अपनी मनोकामना के लिए यहां पहुंचते हैं।

लालबागचा राजा की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण भक्तों की गहरी आस्था और मन्नत से जुड़ी मान्यताएं हैं। गणेशोत्सव के दौरान यहां का माहौल भक्ति, उत्साह और सेवा की भावना से भर जाता है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर भक्त बप्पा को अपनी श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा अर्पित करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण भावना श्रद्धा और विश्वास की मानी जाती है।

For English Newshttp://newz24india.in

Related Articles

Back to top button