धर्म

पिठोरी अमावस्या की रात करें कपूर का ये उपाय, घर की कलह और अशांति दूर करने की मान्यता

पिठोरी अमावस्या की रात कपूर का उपाय घर की नकारात्मकता, कलह और अशांति दूर करने के लिए धार्मिक मान्यताओं में कारगर माना जाता है।

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भाद्रपद मास की अमावस्या को पिठोरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन पितरों के तर्पण, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कई तरह के उपाय करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या की रात कपूर से जुड़ा एक आसान उपाय घर के वातावरण में सकारात्मकता लाने में सहायक माना जाता है।

इस साल पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर 2026, गुरुवार को मनाई जा रही है। इसे कुशाग्रहणी अमावस्या, पोला अमावस्या और मातृ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

पिठोरी अमावस्या पर कपूर का क्या महत्व है?

सनातन परंपरा में कपूर का प्रयोग पूजा, आरती और हवन जैसे धार्मिक कार्यों में लंबे समय से किया जाता रहा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक कपूर जलाने से वातावरण शुद्ध और सकारात्मक होता है। इसकी सुगंध को भी घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है।

कपूर का बिना किसी अवशेष के पूरी तरह जल जाना आध्यात्मिक रूप से समर्पण और नकारात्मकता के समाप्त होने का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से पिठोरी अमावस्या पर कपूर से जुड़े उपाय को विशेष महत्व दिया जाता है।

अमावस्या की रात ऐसे करें कपूर का उपाय

यदि परिवार में छोटी-छोटी बातों को लेकर बार-बार तनाव या विवाद की स्थिति बनती रहती है, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार पिठोरी अमावस्या की रात कपूर का यह उपाय किया जा सकता है।

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इसके लिए मिट्टी का दीपक या कोई सुरक्षित अग्निरोधी पात्र लें और उसमें कपूर जलाएं। कपूर जलाने के बाद उसके धुएं को घर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मकता कम करने में मदद मिलती है।

हालांकि, कपूर जलाते समय आग और धुएं को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। इसे बच्चों और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर सुरक्षित स्थान पर ही जलाएं।

पितरों की शांति से भी जुड़ी है मान्यता

अमावस्या को पितरों के प्रति श्रद्धा और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में अमावस्या की रात कपूर जलाने को पितृ शांति से भी जोड़ा जाता है।

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मान्यता है कि इस तरह के धार्मिक उपायों के साथ पितरों का स्मरण और विधि-विधान से तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है। पिठोरी अमावस्या पर श्रद्धापूर्वक किए गए कर्मों को पारिवारिक सुख-शांति से भी जोड़कर देखा जाता है।

घर में सकारात्मक माहौल की मान्यता

कपूर के इस उपाय को केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, सकारात्मक वातावरण से परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और सामंजस्य बढ़ सकता है।

कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि घर का वातावरण शांत और सकारात्मक रहने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और सुख-समृद्धि के मार्ग खुलते हैं। हालांकि, ये सभी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दावे नहीं हैं।

पिठोरी अमावस्या पर किन बातों का रखें ध्यान?

पिठोरी अमावस्या के दिन पूजा-पाठ के साथ पितरों का स्मरण करना और जरूरतमंदों को दान देना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस दिन सात्विक आहार, संयम और श्रद्धा के साथ पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

कपूर का उपाय करते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और इसे खुले, सुरक्षित तथा हवादार स्थान पर ही करें। धार्मिक उपायों को आस्था के रूप में अपनाना चाहिए और किसी भी पारिवारिक समस्या के समाधान के लिए व्यावहारिक प्रयासों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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