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कुलदीप कुमार: कल्याणपुरी में सफाईकर्मी के बाद एक और युवक की हत्या, चरमराई कानून व्यवस्था का नतीजा

कल्याणपुरी में 22 वर्षीय युवक जय सिंह की चाकू मारकर हत्या के बाद AAP विधायक कुलदीप कुमार ने दिल्ली की कानून व्यवस्था और नशे पर सवाल उठाए।

आम आदमी पार्टी ने कल्याणपुरी में सफाई कर्मचारी की हत्या के दो दिन बाद ही एक और युवक की चाकू मारकर हत्या होने पर दिल्ली की बदहाल कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। ‘‘आप’’ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि कल्याणपुरी के ब्लॉक 11 में एक और युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। जब से भाजपा सत्ता में आई है, दिल्ली अपराध की राजधानी बन गई है। दिल्ली पुलिस अपराध रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही है, लेकिन अगर हमारे विधायक आवाज उठाते हैं, तो पुलिस तुरंत सादे कपड़ों में उनका अपहरण कर लेती है। उधर, कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार ने मृतक युवक जय सिंह के परिवार से मुलाकात कर उनका दुख साझा किया और पुलिस से खुलेआम बिक रहे अवैध नशे पर लगाम लगाने की मांग की।

दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर कुलदीप कुमार ने उठाए सवाल

गुरुवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर कुलदीप कुमार ने कहा कि अब देश की राजधानी को अपराध की राजधानी कहा जाने लगा है। दिल्ली में दिनदहाड़े हत्या और अपहरण अब आम बात हो गई है। सुबह खबर पढ़ने पर पता चलता है कि एक ही दिन में तीन, चार या पांच हत्याएं हो गई हैं। स्वतंत्रता दिवस के अगले दिन 16 अगस्त को जब कानून व्यवस्था बहुत चाक-चौबंद होती है, तब कल्याणपुरी में एक सफाई कर्मचारी अनिल की हत्या कर दी गई। अभी उस सफाई कर्मचारी की चिता की आग भी ठंडी नहीं हुई थी कि उसी कल्याणपुरी में एक 22 साल के युवक जय सिंह की रात को चाकू मारकर हत्या कर दी गई। देश की राजधानी में यह सब क्या हो रहा है और क्या दिल्ली अब रहने के लिए सुरक्षित नहीं बची है?

जब हम सफाई कर्मचारी अनिल के लिए धरने पर बैठे थे, तब भी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से यह मांग की थी कि अगर दिल्ली में अपराध रोकना है, तो सबसे पहले अवैध नशे पर लगाम लगानी होगी। आज दिल्ली की कॉलोनियों और झुग्गियों में ड्रग्स, गांजा और इंजेक्शन जैसे नशे खुलेआम बिक रहे हैं। अगर इस अवैध नशे पर लगाम नहीं लगी, तो दिल्ली में ऐसे ही युवकों, बच्चों और महिलाओं की हत्याएं होती रहेंगी। दिल्ली पुलिस ने अब यह ट्रेंड बना लिया है कि शव का पोस्टमार्टम कब होगा और उसे कब जलाया जाएगा, यह पुलिस तय करेगी, जबकि यह अधिकार परिवार का होना चाहिए। जय सिंह के परिवार का भी यही आरोप है कि पुलिस ने जबरदस्ती उनके बच्चे का पोस्टमार्टम कराया।

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कुलदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार को 20 महीने हो गए हैं और उनके पास चार इंजन की सरकार है। वह जब चाहें दिल्ली के पुलिस कमिश्नर, एसएचओ और डीसीपी को बदल सकती हैं। लेकिन अगर सोनम वांगचुक को उठवाना होता है या बच्चों पर लाठियां चलवानी होती हैं, तो उसके लिए पुलिस कमिश्नर का ट्रांसफर कर देते हैं, जबकि दिल्ली में खुलेआम हत्याएं और बलात्कार होने पर पुलिस कमिश्नर को गुलदस्ते दिए जाते हैं। जैसे यह एक टैगलाइन बन गई है कि जो जितना बड़ा अपराधी, भ्रष्टाचारी या उन्माद फैलाने वाला होगा, उसका भाजपा में स्वागत होगा। इसी तरह जो एसएचओ, डीसीपी या पुलिस अधिकारी जितना खराब काम करता है या जिसके इलाके में जितनी ज्यादा हत्याएं होती हैं, रेखा गुप्ता की सरकार उसका डिमोशन करने के बजाय प्रमोशन करती है।

नशे और बढ़ते अपराध को लेकर दिल्ली सरकार पर निशाना

कुलदीप कुमार ने बताया कि कल्याणपुरी में पिछले चार दिनों में यह दूसरी हत्या है। वहां की महिलाओं ने बताया कि कल्याणपुरी की झुग्गियों और बस्तियों में पुलिस के संरक्षण में खुलेआम नशा बिक रहा है और पुलिस को एक-एक जगह का पता है। अगर दिल्ली पुलिस ने एक हफ्ते के अंदर कल्याणपुरी में नशा बंद नहीं कराया, तो आम आदमी पार्टी कल्याणपुरी थाने का घेराव करेगी। वह थाना अब मुजरिमों को पकड़ने के बजाय उन्हें बचाने और अपराध को बढ़ावा देने का अड्डा बन चुका है। निकम्मी सरकार की वजह से जिस 22 साल के युवक की हत्या हुई है, वह झुग्गी में रहता था और अपने घर का इकलौता बेटा था। उसके घर में बूढ़ी मां और छोटा बच्चा है, उसके पिता नहीं हैं। भाजपा सरकार डीएम के माध्यम से उस पीड़ित परिवार को तुरंत आर्थिक सहायता दे।

कुलदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली में लगातार हो रहे अपराध और जगह-जगह बिक रहे नशे को लेकर हम दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगेंगे। आम आदमी पार्टी के विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस कमिश्नर से मिलकर अपने-अपने इलाके की समस्याएं और दिल्ली की दुर्दशा उनके सामने रखेगा। उम्मीद है कि कमिश्नर मिलने का समय देंगे ताकि दिल्ली की कानून व्यवस्था पर चर्चा की जा सके, क्योंकि दिल्ली सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है। दिल्ली सरकार के हाथ से स्थितियां बाहर हैं और वे न तो अपराध संभाल पा रहे हैं और न ही अस्पताल संभाल पा रहे हैं।

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