पाटीदार आंदोलन की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग तेज, मनोज सोरठिया समेत AAP नेताओं ने सरकार से पारदर्शिता और कार्रवाई की मांग की।
गुजरात में वर्ष 2015 के पाटीदार आरक्षण आंदोलन से जुड़ी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के संगठन महामंत्री मनोज सोरठिया ने राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब पाटीदार आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई की जांच से संबंधित रिपोर्ट सरकार को मिल चुकी है, तो इसे अब तक जनता के सामने क्यों नहीं रखा गया।
रिपोर्ट मिलने के बावजूद सार्वजनिक नहीं करने पर सवाल
मनोज सोरठिया ने कहा कि सरकार के एक मंत्री विधानसभा में यह स्वीकार कर चुके हैं कि आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई की जांच करने वाली समिति की रिपोर्ट सरकार को वर्ष 2020-21 में प्राप्त हो गई थी। ऐसे में रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पाटीदार आंदोलन के दौरान समाज के लोगों के साथ कथित तौर पर गंभीर ज्यादती हुई थी। सोरठिया ने कहा कि आंदोलन में युवाओं की मौत हुई और कई लोगों को कानूनी मामलों का सामना करना पड़ा। ऐसे में जांच रिपोर्ट सामने आना जरूरी है ताकि घटना से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदार लोगों की स्थिति स्पष्ट हो सके।
किसे बचाने के लिए रिपोर्ट रोकी गई?
AAP नेता ने सवाल किया कि यदि रिपोर्ट सरकार के पास उपलब्ध है, तो उसे समाज और आम जनता से छिपाने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि रिपोर्ट में किन अधिकारियों या जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।
मनोज सोरठिया ने भाजपा में मौजूद पाटीदार समाज के वरिष्ठ नेताओं से भी अपील की कि वे इस मुद्दे पर अपनी सरकार से खुलकर जवाब मांगें। उन्होंने कहा कि यह विषय किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं होना चाहिए और समाज के हित में सभी को एकजुट होकर रिपोर्ट सार्वजनिक कराने की मांग करनी चाहिए।
धर्मेश भंडेरी ने भी उठाया मुद्दा
AAP के संगठन मंत्री और सूरत के कॉरपोरेटर धर्मेश भंडेरी ने भी पाटीदार आंदोलन की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 के आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित दमन को लेकर कई सवाल आज भी बने हुए हैं।
भंडेरी के मुताबिक, विधानसभा के मानसून सत्र में AAP विधायक गोपाल इटालिया द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार की ओर से जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने की जानकारी दी गई थी। उन्होंने सवाल किया कि रिपोर्ट मिलने के बाद भी इसे सार्वजनिक करने में देरी क्यों हो रही है।
उन्होंने खोडलधाम, उमियाधाम सहित पाटीदार समाज के प्रमुख नेताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार के सामने रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग रखने का आह्वान किया।
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14 युवाओं की मौत का भी उठाया मुद्दा
AAP गुजरात महिला मोर्चा की अध्यक्ष पायल साकरिया ने भी विधानसभा में उठाए गए इस मुद्दे का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पाटीदार आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज और गोलीबारी की जांच के बावजूद कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
साकरिया ने दावा किया कि आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले 14 युवाओं के परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन से जुड़े कई युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों के कारण उन्हें अब तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने पाटीदार समाज के नेताओं से अपील की कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद के बजाय समाज और न्याय से जुड़े विषय के रूप में देखें।
जीगीशा पटेल ने कार्रवाई की मांग उठाई
AAP नेता जीगीशा पटेल ने कहा कि पाटीदार आरक्षण आंदोलन को 11 वर्ष बीतने के बावजूद कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने सरकार से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पटेल ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान गोलीबारी और लाठीचार्ज से जुड़े मामलों में कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय हुई है, तो उसके आधार पर कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।
सरकार से पारदर्शिता की मांग
AAP नेताओं ने एकजुट होकर सरकार से पाटीदार आंदोलन की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। मनोज सोरठिया ने कहा कि रिपोर्ट को सामने लाने से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं की जांच में क्या निष्कर्ष सामने आए और सरकार ने उन निष्कर्षों पर क्या कदम उठाए।
उन्होंने पाटीदार समाज के नेताओं और आंदोलन से जुड़े लोगों से भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाने की अपील की। AAP का कहना है कि सरकार को रिपोर्ट सार्वजनिक कर पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए और यदि जांच में किसी की जिम्मेदारी तय होती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
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