घर में छोटे बच्चे और Pets हैं? फर्श की सफाई के लिए फिनाइल और Plant based Cleaners में से ऐसे करें सही चुनाव
बच्चे दिन भर फर्श पर खेलते हैं और pets उसी फर्श पर सोते और पंजे चाटते हैं। ऐसे में पोछे के पानी में क्या मिलाया जा रहा है, यह सवाल छोटा नहीं है।
भारतीय घरों में पोछे की बाल्टी में फिनाइल डालना बरसों पुरानी आदत है। लेकिन जिन घरों में घुटनों के बल चलने वाला बच्चा हो या pet, वहां यह सोचना ज़रूरी हो जाता है कि फर्श पर रोज़ क्या छोड़ा जा रहा है।इसका मतलब यह नहीं कि फिनाइल इस्तेमाल करने वाला हर घर गलत कर रहा है। सवाल सिर्फ इतना है कि आपके घर की ज़रूरत क्या है और किस प्रोडक्ट को कितनी सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए।
फिनाइल और तेज़ डिसइन्फेक्टेंट: क्या ध्यान रखें
फिनाइल और इसी तरह के तेज़ डिसइन्फेक्टेंट फ्लोर क्लीनर आम तौर पर ऐसे तत्वों से बने होते हैं जो निगलने पर या आंखों और त्वचा के सीधे संपर्क में आने पर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए इनकी बोतल पर लिखी चेतावनी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कुछ बुनियादी बातें हर घर में अपनाई जा सकती हैं:
- बोतल हमेशा बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर, ऊंची या बंद अलमारी में रखें।
- इसे कभी पानी की बोतल या किसी दूसरे डिब्बे में भरकर न रखें, ताकि कोई गलती से पी न ले।
- लेबल पर लिखी मात्रा के हिसाब से ही पानी में मिलाएं। ज़्यादा डालने से फर्श ज़्यादा साफ़ नहीं होता।
- पोछा लगाते समय खिड़की-दरवाज़े खुले रखें, ताकि गंध और भाप कमरे में जमा न हो।
- फिनाइल को ब्लीच, टॉयलेट क्लीनर या किसी दूसरे क्लीनर के साथ कभी न मिलाएं। अलग-अलग केमिकल मिलने से हानिकारक गैस बन सकती है।
- अगर कोई बच्चा या pet गलती से इसे पी ले, तो घरेलू नुस्खे आज़माने के बजाय तुरंत डॉक्टर या पशु-चिकित्सक से संपर्क करें और बोतल साथ ले जाएं।
Pets के मामले में एक बात और समझनी चाहिए। कुत्ते और बिल्लियां गीले फर्श पर चलते हैं और बाद में अपने पंजे चाटते हैं। बिल्लियों के बारे में आम तौर पर माना जाता है कि वे फिनोल जैसे तत्वों के प्रति ज़्यादा संवेदनशील होती हैं। इसलिए किसी भी तेज़ क्लीनर से पोछा लगाने के बाद फर्श पूरी तरह सूखने तक उन्हें उस कमरे से दूर रखना बेहतर है।
प्लांट-बेस्ड फ्लोर क्लीनर क्या होते हैं
पिछले कुछ सालों में बाज़ार में ऐसे फ्लोर क्लीनर आए हैं जो पौधों से मिलने वाले सर्फैक्टेंट (यानी गंदगी हटाने वाले तत्व) और प्राकृतिक स्रोतों से बने इंग्रेडिएंट्स पर आधारित होते हैं। इनकी गंध आम तौर पर हल्की होती है और इन्हें रोज़ की सफाई के लिए बनाया जाता है।
यहां एक बात साफ़ समझ लेनी चाहिए। “प्लांट-बेस्ड” का मतलब यह नहीं कि उसे बिना सावधानी के कहीं भी रख दिया जाए। कोई भी क्लीनर हो, उसे बच्चों की पहुंच से दूर रखना और लेबल पढ़कर इस्तेमाल करना हर हाल में ज़रूरी है। फर्क यह है कि रोज़ के पोछे के लिए कई परिवार अब हल्की गंध वाला विकल्प चाहते हैं।
कैसे तय करें कि आपके घर के लिए क्या सही है
सबसे पहले यह देखें कि सफाई किस तरह की चाहिए। रोज़ की धूल, पैरों के निशान और हल्की चिकनाई के लिए आम तौर पर हल्का फ्लोर क्लीनर काफी होता है। अगर किसी खास वजह से तेज़ डिसइन्फेक्टेंट इस्तेमाल करना ही है, तो ऊपर बताई सावधानियों के साथ और लेबल के निर्देशों के मुताबिक ही करें।
दूसरी बात है फर्श का प्रकार। मार्बल, लकड़ी और कुछ टाइल्स पर बहुत तेज़ या ज़्यादा एसिडिक-एल्कलाइन क्लीनर लंबे समय में चमक कम कर सकते हैं। इसलिए pH-बैलेंस्ड क्लीनर कई घरों के लिए व्यावहारिक विकल्प बनते हैं।
तीसरी बात है लेबल पढ़ने की आदत। बोतल पर इंग्रेडिएंट्स, इस्तेमाल का तरीका और चेतावनी ज़रूर देखें।
बाज़ार में मौजूद एक विकल्प
ऐसे ही विकल्पों में गुरुग्राम की PraniClean Organics का ब्रांड Peels & Co भी है, जो प्लांट-बेस्ड होम क्लीनर बनाता है। कंपनी के मुताबिक इसके प्रोडक्ट 100% बायोडिग्रेडेबल हैं, बच्चों और पालतू जानवरों के लिए सुरक्षित हैं, स्वतंत्र लैब में टेस्ट किए गए हैं और हार्श टॉक्सिन्स, पैराबेन व सिंथेटिक VOCs से मुक्त हैं।
इसका मोगरा की खुशबू वाला प्लांट–बेस्ड फ्लोर क्लीनर पील एंजाइम कॉम्प्लेक्स और प्लांट-बेस्ड सर्फैक्टेंट्स से बना है और pH-बैलेंस्ड है। कंपनी इसे मार्बल, टाइल, लकड़ी और सिरेमिक फर्श के लिए बताती है। आधी बाल्टी पानी में करीब 30ml डालना होता है और पोछे के बाद अलग से धोने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
आखिर में
फर्श की सफाई का कोई एक नियम सब घरों पर लागू नहीं होता। जो भी क्लीनर चुनें, उसे सही मात्रा में, हवादार कमरे में और बच्चों-पालतुओं से दूर रखकर इस्तेमाल करें। किसी दो क्लीनर को आपस में न मिलाएं और पोछे के बाद फर्श सूखने दें। यही छोटी आदतें घर को साफ़ और सुरक्षित, दोनों रखती हैं।



