ट्रेंडिंग

नवजात और छोटे बच्चों के कपड़े कैसे धोएं: संवेदनशील त्वचा के लिए आसान तरीके

बच्चे की त्वचा बड़ों के मुकाबले कहीं ज़्यादा नाज़ुक होती है। कपड़े धोने के तरीके में कुछ छोटे बदलाव उसे आरामदायक रखने में मदद कर सकते हैं।

घर में नन्हा मेहमान आने से पहले ही मां-बाप छोटे-छोटे झबले, टोपियां, मोज़े और गद्दियां खरीदकर रख लेते हैं। लेकिन अक्सर इस बात पर कम ध्यान जाता है कि इन कपड़ों को धोया कैसे जाए। बच्चे की त्वचा पतली और नाज़ुक होती है, इसलिए कपड़ों पर रह गया डिटर्जेंट, तेज़ खुशबू या फ़ैक्ट्री की फ़िनिशिंग भी कई बार असहजता का कारण बन सकती है।

यहां कुछ सामान्य और व्यावहारिक सुझाव दिए जा रहे हैं, जिन्हें ज़्यादातर घरों में आसानी से अपनाया जा सकता है।

नए कपड़े पहनाने से पहले ज़रूर धोएं

दुकान से आए नए कपड़े देखने में भले ही साफ़ लगें, लेकिन बनाने, पैक करने और दुकान तक पहुंचने के दौरान उन पर धूल, रंग की अतिरिक्त परत और फ़िनिशिंग में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ रह सकते हैं। कई लोग इन्हें हाथ में पकड़कर ही देख लेते हैं। इसलिए किसी भी नए कपड़े को, चाहे वह गिफ़्ट में मिला हो या खुद खरीदा हो, बच्चे को पहनाने से पहले एक बार धो लेना अच्छी आदत है।

चादर, तौलिया, बेबी ब्लैंकेट और कपड़े के डायपर पर भी यही नियम लागू होता है। धोने से पहले लेबल पर लिखे निर्देश पढ़ लें, ताकि ऊनी या नाज़ुक कपड़े खराब न हों।

हल्का डिटर्जेंट और दो बार खंगालना

बच्चों के कपड़ों के लिए ऐसा डिटर्जेंट चुनें जो हल्का हो, जिसकी खुशबू बहुत तेज़ न हो और जिसके लेबल पर सामग्री साफ़ लिखी हो। पाउडर की तुलना में लिक्विड डिटर्जेंट पानी में जल्दी घुल जाता है, इसलिए उसके कण कपड़ों में फंसे रहने की संभावना कम होती है।

सबसे ज़रूरी कदम है डबल rinse। यानी साबुन से धोने के बाद कपड़ों को कम से कम दो बार साफ़ पानी में खंगालें। वॉशिंग मशीन में अक्सर “extra rinse” का विकल्प होता है, उसका इस्तेमाल करें। हाथ से धो रहे हैं तो तब तक खंगालें जब तक पानी में झाग दिखना बंद न हो जाए।

ध्यान रखने लायक कुछ और बातें:

  • बच्चे के कपड़े बड़ों के कपड़ों से अलग धोएं, खासकर जूते या बाहर के गंदे कपड़ों से
  • डिटर्जेंट उतना ही डालें जितना पैक पर बताया गया है, ज़्यादा डालने से कपड़ों में साबुन रह जाता है
  • दूध या खाने के दाग को तुरंत ठंडे पानी से धो लें, ताकि वे जमें नहीं
  • फ़ैब्रिक सॉफ़्टनर का इस्तेमाल बहुत कम करें या ज़रूरत न हो तो न करें
  • तेज़ ब्लीच और बहुत गर्म पानी से बचें, जब तक कपड़े के लेबल पर न लिखा हो

धूप में सुखाना और सॉफ़्टनर से सावधानी

हमारे यहां कपड़ों को धूप में सुखाने की पुरानी परंपरा है, और बच्चों के कपड़ों के लिए यह अब भी एक अच्छा तरीका है। धूप और खुली हवा में कपड़े अच्छी तरह सूखते हैं और उनमें सीलन की गंध नहीं आती। बस बहुत रंगीन कपड़ों को उल्टा करके सुखाएं ताकि रंग फीका न पड़े। मानसून के दिनों में कपड़ों को हवादार जगह पर पूरी तरह सूखने दें, अधसूखे कपड़े अलमारी में न रखें।

फ़ैब्रिक सॉफ़्टनर कपड़ों को मुलायम और खुशबूदार तो बनाता है, लेकिन यह कपड़ों पर एक परत छोड़ देता है और इसमें अक्सर तेज़ खुशबू होती है। छोटे बच्चों के कपड़ों में इसका ज़्यादा इस्तेमाल न करना ही बेहतर है। सूती कपड़े सही तरह धोने और खंगालने पर वैसे भी मुलायम रहते हैं।

सही उत्पाद चुनते समय क्या देखें

आजकल बाज़ार में कई ऐसे लॉन्ड्री उत्पाद हैं जो पौधों से बने तत्वों पर आधारित हैं। लेबल पर देखें कि उत्पाद में parabens या कठोर रसायन हैं या नहीं, वह biodegradable है या नहीं, और क्या उसकी जांच किसी स्वतंत्र लैब में हुई है।

उदाहरण के लिए, Peels & Co का लैवेंडर और जेरेनियम वाला प्लांट-बेस्ड लॉन्ड्री लिक्विड पौधों पर आधारित है और कंपनी के अनुसार संवेदनशील त्वचा पर हल्का है, बच्चों और पालतू जानवरों वाले घरों के लिए सुरक्षित है, तथा parabens और synthetic VOCs से मुक्त है। जो परिवार अलग-अलग विकल्प देखना चाहते हैं, वे पौधों से बने कपड़े धोने के डिटर्जेंट की श्रेणी भी देख सकते हैं। कोई भी नया डिटर्जेंट शुरू करें तो पहले कुछ कपड़ों पर आज़माकर देखें।

कब डॉक्टर से बात करें

ऊपर दिए गए सुझाव सामान्य देखभाल से जुड़े हैं। अगर बच्चे की त्वचा पर लाल चकत्ते, दाने, सूखापन या खुजली बार-बार दिखे, तो खुद से कोई इलाज न करें और बाल रोग विशेषज्ञ (paediatrician) से सलाह लें। कई बार इसकी वजह कपड़े या डिटर्जेंट के अलावा कुछ और भी हो सकती है, जिसे डॉक्टर ही सही तरह समझ सकते हैं।

थोड़ी सी सावधानी, सही मात्रा में हल्का डिटर्जेंट और अच्छी तरह खंगालने की आदत, यही बच्चों के कपड़े धोने का सबसे आसान फ़ॉर्मूला है।

Related Articles

Back to top button