बिहारराज्य

सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर रेल लाइन दोहरीकरण में तेजी, मुआवजा तय करने के लिए 5 सदस्यीय कमेटी गठित

सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर रेल लाइन दोहरीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण तेज हो गया है। मुआवजा तय करने को मुजफ्फरपुर में 5 सदस्यीय कमेटी बनी है।

उत्तर बिहार की रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने वाली सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुजफ्फरपुर जिले के तीन अंचलों में प्रस्तावित भूमि का वास्तविक उपयोग और उसके आधार पर उचित मुआवजा तय करने के लिए जिला प्रशासन ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।

समिति संबंधित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करेगी और जमीन की मौजूदा स्थिति के आधार पर अपनी रिपोर्ट जिला भू-अर्जन कार्यालय को सौंपेगी। इसके बाद अधिग्रहण की अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

मौजूदा उपयोग के आधार पर तय होगी मुआवजा राशि

पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर के उप मुख्य अभियंता (निर्माण-01) की ओर से 17 जुलाई को भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रस्ताव भेजा गया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए समिति बनाई है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक जमीन का मुआवजा केवल पुराने खतियान में दर्ज विवरण के आधार पर तय नहीं किया जाएगा। इसके बजाय मौके पर जमीन का वर्तमान उपयोग देखा जाएगा।

समिति यह जांच करेगी कि संबंधित जमीन आवासीय, व्यावसायिक या कृषि कार्य में इस्तेमाल हो रही है। इससे जमीन मालिकों यानी रैयतों को उनकी भूमि की वास्तविक स्थिति के अनुरूप मुआवजा निर्धारित करने में मदद मिलेगी।

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इन इलाकों में होगी जमीन अधिग्रहण

सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर रेल लाइन दोहरीकरण के लिए मुजफ्फरपुर जिले के तीन अंचलों के कई मौजों को भूमि अधिग्रहण के दायरे में रखा गया है।

बोचहां अंचल: झपहां, थाना नंबर-594
औराई अंचल: धरहरवा उर्फ परी धरहरवा, थाना नंबर-01
मीनापुर अंचल: छपरा मोबारक, थाना नंबर-596
मीनापुर अंचल: शाहपुर मुतालुके अहियापुर, थाना नंबर-597

इन क्षेत्रों में भूमि की वास्तविक प्रकृति का सत्यापन समिति द्वारा किया जाएगा।

पांच सदस्यीय समिति में कौन-कौन अधिकारी?

जमीन के निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए गठित समिति में जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति की अध्यक्षता अपर समाहर्ता (राजस्व) करेंगे।

समिति में उप विकास आयुक्त, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, जिला अवर निबंधक और भूमि सुधार उप समाहर्ता यानी डीसीएलआर शामिल हैं। जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।

स्थलीय जांच के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

समिति संबंधित जमीनों का भौतिक सत्यापन करेगी। निरीक्षण के दौरान जमीन की वर्तमान स्थिति, उपयोग और अन्य जरूरी पहलुओं का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार होगी।

सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर रेल लाइन दोहरीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि इसी के आधार पर मुआवजे से संबंधित मूल्यांकन को आगे बढ़ाया जाएगा।

भूमि राशि पोर्टल पर अपलोड होगा पूरा डेटा

जिला प्रशासन के अनुसार, समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अधिग्रहित की जाने वाली जमीन से संबंधित पूरा डेटा केंद्र सरकार के भूमि राशि पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

इसके बाद परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ी धारा-20A की अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अधिसूचना के बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत भूमि अधिग्रहण का काम पूरा किया जाएगा।

उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी को मिलेगा फायदा

सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर रेल लाइन दोहरीकरण को उत्तर बिहार की रेल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। लाइन के दोहरीकरण से भविष्य में रेल परिचालन की क्षमता बढ़ाने और ट्रेनों के संचालन को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल जिला प्रशासन का फोकस भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाने और जमीन मालिकों के लिए उचित मुआवजा निर्धारित करने पर है। समिति की रिपोर्ट और उसके बाद की अधिसूचना से परियोजना के अगले चरण का रास्ता साफ होगा।

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