स्पिरुलिना पाउडर: प्रोटीन से भरपूर इस सुपरफूड के फायदे और इस्तेमाल का सही तरीका
स्पिरुलिना पाउडर प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर है। जानें इसके संभावित फायदे, सेवन का सही तरीका और किन लोगों को इससे बचना चाहिए।
आजकल स्वस्थ खानपान को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है और कई पोषक खाद्य पदार्थ तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन्हीं में स्पिरुलिना पाउडर भी शामिल है। यह नीले-हरे रंग का एक सूक्ष्म शैवाल है, जिसे आमतौर पर पाउडर या आहार अनुपूरक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसमें प्रोटीन के साथ कई अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।
प्रमाणित पोषण विशेषज्ञ और वजन कम करने की विशेषज्ञ लीमा महाजन के अनुसार, स्पिरुलिना प्रोटीन से भरपूर प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में शामिल है। हालांकि, किसी भी आहार अनुपूरक को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले उसकी गुणवत्ता और अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है।
स्पिरुलिना में कितना प्रोटीन होता है?
सूखे स्पिरुलिना में प्रोटीन की मात्रा काफी अधिक बताई जाती है। विशेषज्ञ के अनुसार, इसके सूखे वजन का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा प्रोटीन हो सकता है। यही वजह है कि इसे प्रोटीन का एक केंद्रित स्रोत माना जाता है।
करीब 5 ग्राम स्पिरुलिना में लगभग 3.2 ग्राम प्रोटीन मिलने की बात कही जाती है। इसमें आवश्यक अमीनो अम्ल भी पाए जाते हैं। हालांकि, वास्तविक पोषण मात्रा उत्पाद और उसकी गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
आयरन का भी अच्छा स्रोत
स्पिरुलिना पाउडर में सिर्फ प्रोटीन ही नहीं, बल्कि आयरन समेत कई अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार, इसमें मौजूद आयरन शरीर के लिए उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, यदि किसी व्यक्ति में आयरन की कमी या खून की कमी है, तो केवल स्पिरुलिना पर निर्भर रहना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
शरीर को क्या फायदे मिल सकते हैं?
स्पिरुलिना में फाइकोसायनिन नामक प्राकृतिक रंगद्रव्य पाया जाता है, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाव में भूमिका निभाते हैं।
कुछ अध्ययनों में स्पिरुलिना के सेवन और रक्त में कोलेस्ट्रॉल तथा ट्राइग्लिसराइड के स्तर में संभावित सुधार के बीच संबंध देखा गया है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
शाकाहारी लोगों के लिए कितना उपयोगी?
शाकाहारी भोजन लेने वाले लोगों के लिए प्रोटीन के कई स्रोत उपलब्ध हैं, जिनमें दालें, सोयाबीन, राजमा, चना, दूध और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हैं। स्पिरुलिना भी इनमें एक केंद्रित विकल्प हो सकता है।
स्पिरुलिना पाउडर की थोड़ी मात्रा में अपेक्षाकृत अधिक प्रोटीन मिल सकता है, लेकिन इसे संतुलित भोजन या प्रोटीन के अन्य प्राकृतिक स्रोतों का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
स्पिरुलिना का सेवन कैसे करें?
स्पिरुलिना का स्वाद कुछ लोगों को कड़वा या तेज लग सकता है। इसे पानी या अन्य पेय में मिलाकर लिया जा सकता है। पोषण विशेषज्ञ लीमा महाजन के अनुसार, स्वाद बेहतर करने के लिए इसमें आंवला, अदरक और ताजा धनिया मिलाया जा सकता है।
आंवला विटामिन सी का अच्छा स्रोत है। विटामिन सी भोजन से मिलने वाले पौधों के स्रोत वाले आयरन के अवशोषण में मदद कर सकता है।
पहली बार इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों को कम मात्रा से शुरुआत करनी चाहिए। उत्पाद के पैकेट पर दिए गए सेवन संबंधी निर्देशों का पालन करना भी जरूरी है।
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अच्छी गुणवत्ता वाला उत्पाद ही चुनें
स्पिरुलिना पाउडर खरीदते समय उसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ऐसे उत्पाद को प्राथमिकता दें जिसकी गुणवत्ता और दूषित पदार्थों की मौजूदगी के लिए उचित जांच की गई हो।
खराब गुणवत्ता वाले शैवाल आधारित उत्पादों में दूषित पदार्थों का जोखिम हो सकता है। इसलिए केवल कीमत या प्रचार के आधार पर कोई उत्पाद खरीदने के बजाय विश्वसनीय स्रोत से ही इसे लेना बेहतर है।
किन लोगों को स्पिरुलिना से सावधान रहना चाहिए?
गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को स्पिरुलिना का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
ऑटोइम्यून बीमारी से जूझ रहे लोगों तथा प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने वाली दवाएं या खून पतला करने वाली दवाएं लेने वालों को भी बिना चिकित्सकीय सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा, जो लोग रक्त शर्करा, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल या थायरॉयड से जुड़ी दवाएं लेते हैं, उन्हें भी आहार अनुपूरक शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
संतुलित आहार का विकल्प नहीं है स्पिरुलिना
स्पिरुलिना पाउडर प्रोटीन और कुछ अन्य पोषक तत्वों का केंद्रित स्रोत हो सकता है, लेकिन इसे संतुलित आहार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अलग-अलग खाद्य समूहों से पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन, खनिज, फाइबर और अन्य पोषक तत्व लेना जरूरी है।
इसलिए इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले अपनी जरूरत, स्वास्थ्य स्थिति और इस्तेमाल किए जा रहे उत्पाद की गुणवत्ता पर ध्यान दें। किसी बीमारी या नियमित दवा की स्थिति में डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे उचित रहेगा।
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