स्वास्थ्य

स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो न करें नजरअंदाज, डॉक्टर ने बताए H1N1 के गंभीर संकेत

स्वाइन फ्लू के लक्षणों में तेज बुखार, खांसी और गले में दर्द शामिल हैं। जानें H1N1 के गंभीर संकेत और संक्रमण से बचाव के आसान तरीके।

देश के कई हिस्सों में इन्फ्लूएंजा और H1N1 संक्रमण के मामलों को लेकर चिंता बढ़ रही है। दिल्ली में भी इस साल अब तक स्वाइन फ्लू के बड़ी संख्या में मामले सामने आने की बात कही गई है। ऐसे में बीमारी के शुरुआती संकेतों को पहचानना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है। डॉक्टरों के मुताबिक स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं, लेकिन कुछ स्थितियों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली में इस साल H1N1 के 1,777 पुष्ट मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, केरल और कर्नाटक में भी इन्फ्लूएंजा संक्रमण के मामलों की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, संक्रमण की गंभीरता व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य जोखिम कारकों पर निर्भर कर सकती है।

तेज बुखार और खांसी को न समझें मामूली

प्रोफेसर डॉ. संजीव बगाई के अनुसार, तेज बुखार के साथ ठंड लगना, खांसी और गले में दर्द H1N1 संक्रमण के संभावित संकेत हो सकते हैं। अगर बुखार लगातार बना हुआ है और करीब 48 घंटे में इसमें सुधार नहीं होता, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों में बीमारी हल्के फ्लू की तरह रह सकती है, जबकि कुछ मामलों में सांस से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है।

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बच्चों में इन संकेतों पर रखें खास नजर

बच्चों में वायरल संक्रमण के दौरान विशेष सावधानी की जरूरत होती है। बुखार और खांसी के अलावा अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती, कमजोरी या खाना-पीना कम करने जैसी समस्या हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बच्चों में सांस से जुड़ी परेशानी तेजी से बढ़ सकती है। इसलिए अभिभावकों को बच्चे की हालत में अचानक बदलाव दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. स्वाति माहेश्वरी के मुताबिक, अगर दो से तीन दिन से अधिक समय तक बुखार बना रहता है और दवा लेने के बावजूद कम नहीं होता, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इसके अलावा खांसी के साथ सांस लेने में तकलीफ होना भी चेतावनी का संकेत हो सकता है। बच्चों में उल्टी-दस्त, लगातार कमजोरी या पर्याप्त खाना-पीना न कर पाना जैसी समस्याएं दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण गंभीर होने पर सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं। इसलिए केवल घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

स्वाइन फ्लू से बचने के लिए क्या करें?

डॉ. संजीव बगाई के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को सर्दी, खांसी, गले में दर्द या तेज बुखार है तो उसे संक्रमण फैलने से रोकने के लिए घर पर आराम करना चाहिए। बीमारी के दौरान बच्चों को स्कूल भेजने से भी बचना चाहिए।

बचाव के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के अनुसार मास्क पहनें।
  • हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से साफ करें।
  • आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें।
  • बीमार होने पर दूसरों के संपर्क को सीमित करें।
  • खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक ढकें।
  • पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेते रहें।
  • लक्षण बढ़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?

छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू संक्रमण के कारण जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

लक्षण दिखें तो समय पर लें विशेषज्ञ की सलाह

H1N1 संक्रमण के शुरुआती संकेत सामान्य वायरल या फ्लू जैसे लग सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी की पुष्टि करना सही नहीं है। लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या खाना-पीना मुश्किल होने जैसे संकेत दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

स्वाइन फ्लू के लक्षण समय पर पहचानने और उचित चिकित्सकीय सलाह लेने से गंभीर स्थिति के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में स्वास्थ्य में किसी भी तेजी से होने वाले बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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