8th Pay Commission में OPS बहाली, पेंशन बढ़ोतरी, MACP संशोधन और ₹68,000 न्यूनतम वेतन समेत पेंशनर्स की प्रमुख मांगें जानें।
8th Pay Commission को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। चेन्नई में हुई बैठकों के दौरान चेन्नई GPO पेंशनर्स फोरम ने पेंशन, वेतन, करियर प्रोग्रेशन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। फोरम की सबसे प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू करना शामिल रहा।
पेंशनर्स ने पेंशन और फैमिली पेंशन बढ़ाने, पेंशन कम्यूटेशन की रिकवरी से जुड़े नियमों में स्पष्टता लाने और MACP यानी Modified Assured Career Progression के लाभों को संशोधित करने की भी मांग रखी है।
पुरानी पेंशन योजना की वापसी सबसे बड़ी मांग
चेन्नई बैठक में पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग को प्राथमिकता दी गई। पेंशनर्स का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पेंशन व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए जाने चाहिए।
इसके साथ ही फोरम ने मौजूदा पेंशन और फैमिली पेंशन में बढ़ोतरी की मांग की है, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों को बढ़ती महंगाई के बीच बेहतर आर्थिक सहायता मिल सके।
पेंशन कम्यूटेशन के नियमों में राहत की मांग
कई कर्मचारी अपनी पेंशन के एक हिस्से को कम्यूट कर एकमुश्त राशि लेते हैं। इसके बाद कम्यूटेड पेंशन की रिकवरी से जुड़े नियमों को लेकर कई पेंशनर्स सवाल उठाते रहे हैं।
फोरम ने इस व्यवस्था में स्पष्टता लाने और पेंशनर्स को उचित राहत देने की मांग की है। उनके मुताबिक कम्यूटेशन से जुड़ी प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होनी चाहिए।
MACP और वेतन से जुड़े लाभों में बदलाव की मांग
8th Pay Commission के सामने Modified Assured Career Progression यानी MACP योजना को संशोधित करने का मुद्दा भी उठाया गया। खास तौर पर डाक विभाग के कर्मचारियों ने बेहतर करियर प्रोग्रेशन और वेतन से जुड़े लाभों में सुधार की मांग की है।
इसके अलावा कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बेहतर भत्ते, छुट्टी के नियम और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की मांग भी सामने आई है।
₹68,000 न्यूनतम वेतन और स्थायी वेतन संशोधन की मांग
बैठक में सिर्फ पेंशन से जुड़े मुद्दे ही नहीं उठे। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने ऐसी स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की, जिसके तहत वेतन की समीक्षा के लिए हर बार अगले Pay Commission का इंतजार न करना पड़े।
प्रतिनिधियों ने न्यूनतम वेतन ₹68,000 करने और मौजूदा Pay Matrix के साथ ‘Running Scales’ लागू करने का प्रस्ताव भी रखा। महिलाओं और दिव्यांग कर्मचारियों से जुड़े विशेष मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
हालांकि, ये सभी मांगें फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर हैं। इन्हें अंतिम निर्णय या सरकारी घोषणा नहीं माना जा सकता।
मौजूदा पेंशनर्स के अधिकारों पर कानूनी सवाल
8th Pay Commission से जुड़ी कुछ मांगों को लेकर कानूनी पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है। खासकर पहले से रिटायर हो चुके कर्मचारियों के लाभों की सुरक्षा और सिविल कर्मचारियों के लिए One Rank, One Pension (OROP) की मांग पर विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की बात कही है।
CMS INDUSLAW की पार्टनर अमृता टोंक के अनुसार, पेंशन और ग्रेच्युटी ऐसी अर्जित सुविधाएं हैं जो कर्मचारी द्वारा दी गई सेवा से जुड़ी होती हैं। इसलिए पहले से अर्जित लाभों को कम करने या रोकने वाली व्यवस्था कानूनी विवाद को जन्म दे सकती है, जब तक उसके लिए स्पष्ट कानूनी या वैधानिक आधार मौजूद न हो।
उनका मानना है कि मौजूदा कर्मचारियों द्वारा अर्जित अधिकारों को सुरक्षित रखना और नए नियमों को भविष्य में सेवा में शामिल होने वाले कर्मचारियों पर लागू करना अपेक्षाकृत सुरक्षित रास्ता हो सकता है।
also read:- बैंक हड़ताल 11 सितंबर: लगातार तीन दिन बंद रहेंगे बैंक,…
सिविल कर्मचारियों के लिए OROP क्यों चुनौतीपूर्ण?
सशस्त्र बलों की तुलना में सिविल सेवाओं में विभाग, कैडर और नियुक्ति वर्ष के आधार पर करियर संरचना काफी अलग हो सकती है। ऐसे में सभी सिविल कर्मचारियों के लिए एक समान OROP मॉडल लागू करना जटिल हो सकता है।
कानूनी विशेषज्ञ के मुताबिक, एक समान फॉर्मूला कुछ मौजूदा असमानताओं को दूर करने के बजाय नई विसंगतियां पैदा कर सकता है।
वहीं, वार्षिक वेतन वृद्धि बढ़ाने को अपेक्षाकृत आसान बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि इसे भविष्य के लिए लागू किया जा सकता है और इसके लिए पुराने भुगतान या पहले से अर्जित लाभों की दोबारा गणना करने की आवश्यकता नहीं होगी।
असली चुनौती लागू करने के तरीके में हो सकती है
8th Pay Commission की सिफारिशों को लागू करने के दौरान कटऑफ तारीख, ट्रांजिशन नियम और कर्मचारियों की अलग-अलग श्रेणियों को स्पष्ट करना बेहद महत्वपूर्ण होगा।
कानूनी विशेषज्ञ ने कहा कि अस्पष्ट नियम, अलग-अलग व्याख्याएं और सही जानकारी का अभाव अक्सर सेवा शर्तों से जुड़े मुकदमों और कर्मचारी संगठनों के विवाद का कारण बनते हैं।
इसका असर सिर्फ केंद्र सरकार के कर्मचारियों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। कई राज्य सरकारें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को अपने कर्मचारियों के लिए भी अपनाती हैं। ऐसे में अंतिम ढांचे में अस्पष्टता होने पर राज्यों में भी अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ सकती हैं।
कब आएगी 8th Pay Commission की रिपोर्ट?
8th Pay Commission का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। इसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
उम्मीद है कि आयोग मई-जून 2027 के आसपास अपनी रिपोर्ट सरकार के सामने रख सकता है। आयोग की अगली बैठकें चंडीगढ़ में 16, 17 और 18 सितंबर को प्रस्तावित हैं।
फिलहाल OPS की बहाली, पेंशन बढ़ोतरी, MACP में संशोधन, ₹68,000 न्यूनतम वेतन और स्थायी वेतन संशोधन तंत्र जैसी मांगें विचार के स्तर पर हैं। अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और उसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
For English News: http://newz24india.in
Visit WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Vb4ZuKSLSmbVWNb1sx1x



