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दिल्ली SIR: 33 लाख नोटिस से मचा हड़कंप, नोटिस मिला तो जानें क्या करना है

दिल्ली SIR में 33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस मिले हैं। जानें नोटिस क्यों आया, जवाब कैसे दें और वोटर लिस्ट में नाम बचाने की प्रक्रिया क्या है।

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर इन दिनों चर्चा तेज है। दिल्ली SIR के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.56 लाख नाम शामिल नहीं हो पाए हैं, जबकि 33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक यह प्रक्रिया मतदाता विवरण के सत्यापन और सुधार के लिए है और नोटिस मिलने का अर्थ अपने आप नाम हट जाना नहीं है।

क्या है दिल्ली SIR का पूरा मामला?

दिल्ली SIR की प्रक्रिया 30 जून 2026 को शुरू हुई थी। उस समय दिल्ली की मतदाता सूची में 1,45,10,299 मतदाता दर्ज थे। घर-घर जाकर गणना और सत्यापन के बाद 31 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई, जिसमें 97,53,577 मतदाताओं के नाम शामिल थे। यानी 47,56,722 नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं आए। चुनाव आयोग ने इन प्रविष्टियों को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में रखा है।

इन 47.56 लाख नामों के पीछे क्या वजह बताई गई?

आंकड़ों के मुताबिक करीब 31.59 लाख मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया, जबकि 11.73 लाख मतदाता अनुपस्थित या अप्राप्य श्रेणी में रखे गए। इसके अलावा करीब 2.82 लाख नाम मृत मतदाताओं के और 1.41 लाख नाम डुप्लीकेट या एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत मतदाताओं से जुड़े बताए गए हैं। ये ड्राफ्ट स्तर के आंकड़े हैं और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद इनमें बदलाव संभव है।

33 लाख से ज्यादा लोगों को नोटिस क्यों भेजे गए?

दिल्ली SIR में ड्राफ्ट सूची में शामिल करीब 33.13 लाख मतदाताओं को विवरण में विसंगतियों के कारण नोटिस भेजे गए हैं। इनमें लगभग 13.79 लाख मतदाताओं के विवरण को पिछली SIR सूची से मैप नहीं किया जा सका, जबकि करीब 19.33 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ दर्ज की गई।

इन विसंगतियों में नाम, उम्र, माता-पिता या अन्य पारिवारिक विवरण से जुड़ी जानकारी का मेल न होना शामिल हो सकता है। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है।

नोटिस मिला है तो घबराने की जरूरत क्यों नहीं?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नोटिस मिलना अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बराबर नहीं है। नोटिस पाने वाले मतदाता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने और रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी या दस्तावेज उपलब्ध कराने का मौका मिलता है। सुप्रीम कोर्ट में भी नोटिस और ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं और चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

नोटिस मिलने पर क्या करें?

अगर आपको दिल्ली SIR के तहत नोटिस मिला है, तो सबसे पहले नोटिस में दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ें और यह देखें कि आपका रिकॉर्ड किस कारण से फ्लैग किया गया है। इसके बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना जवाब और आवश्यक दस्तावेज जमा करें।

चुनाव आयोग की ओर से ऑनलाइन माध्यम से मतदाता सेवाओं का उपयोग करने की सुविधा उपलब्ध है। वहीं, मतदाता अपने स्थानीय बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अथवा संबंधित निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से ऑफलाइन प्रक्रिया में भी भाग ले सकते हैं। जिन लोगों का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं आया है, उनके लिए दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया भी उपलब्ध कराई गई है।

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कचरा गाड़ियों से क्यों किया जा रहा है जागरूक?

दिल्ली SIR को लेकर मतदाताओं तक जानकारी पहुंचाने के लिए चुनाव प्रशासन ने अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल शुरू किया है। इनमें कचरा उठाने वाली गाड़ियों के जरिए जागरूकता संदेश देना भी शामिल है। इन वाहनों के माध्यम से उन लोगों को जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है, जिनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं हैं और जिन्हें आगे की प्रक्रिया के तहत आवेदन या सुधार करना है।

इसके अलावा अखबारों, रेडियो और अन्य जनसंचार माध्यमों के जरिए भी लोगों को अपने मतदाता विवरण की जांच करने तथा जरूरत पड़ने पर दावा या आपत्ति दर्ज कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और नोटिस जारी करने के आधार को स्पष्ट करने की मांग की गई है। अदालत के समक्ष ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ जैसी श्रेणियों के इस्तेमाल और उनके आधार को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

ऐसे में मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी है कि वे अपने नाम और विवरण को ड्राफ्ट मतदाता सूची में जांचें। अगर कोई गलती या विसंगति सामने आती है, तो निर्धारित दावे-आपत्ति प्रक्रिया के तहत समय पर अपना पक्ष रखना जरूरी है।

दिल्ली SIR की प्रक्रिया के दौरान ड्राफ्ट आंकड़े अंतिम नहीं हैं। दावे और आपत्तियों की जांच के बाद मतदाता सूची में आवश्यक सुधार किए जाएंगे और अंतिम सूची निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रकाशित की जाएगी।

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