SIR विवाद पर अरविंद केजरीवाल ने प्रक्रिया रद्द करने, पुरानी वोटर लिस्ट बहाल करने और हालिया चुनाव दोबारा कराने समेत तीन मांगें रखीं।
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसी बीच दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग से जुड़े एक हालिया विवाद का हवाला देते हुए तीन बड़ी मांगें रखी हैं। उन्होंने SIR प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे आजाद भारत का सबसे बड़ा स्कैंडल तक बताया।
केजरीवाल की यह प्रतिक्रिया उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और चुनावी डेटाबेस के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
अरविंद केजरीवाल ने रखीं तीन मांगें
अरविंद केजरीवाल ने SIR विवाद के बीच तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं। पहली मांग में उन्होंने पूरी SIR प्रक्रिया को रद्द करने और करीब तीन साल पुरानी मतदाता सूची को बहाल करने की बात कही।
दूसरी मांग के तहत उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की। तीसरी मांग में उन्होंने दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव दोबारा कराने की बात कही। इन मांगों की जानकारी 23 सितंबर को सामने आए उनके बयान के आधार पर रिपोर्ट की गई है।
क्या है SIR को लेकर विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण करना है। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम और पात्रता से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
also read:- दवा घोटाले की जांच करने पर ACB चीफ का तबादला? सौरभ…
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में कहा गया कि इनमें चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज हुई थीं। मुद्दों में Form 6 में बदलाव, मतदाता डेटा के प्रबंधन और कुछ राज्यों में मतदाता नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया शामिल थी।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग के सूत्रों ने आंतरिक मतभेद की बात से इनकार किया। आयोग की ओर से कहा गया कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के मुताबिक, किसी मुद्दे पर व्यक्तिगत स्तर पर उठाई गई चिंताओं को संस्थागत फैसले में असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
यानी एक ओर रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों का उल्लेख है, वहीं निर्वाचन आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि SIR और अन्य फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
मतदाता सूची और नाम हटाने को लेकर भी सवाल
SIR को लेकर मतदाता सूची से नाम हटाने और नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता डेटाबेस को केंद्रीय स्तर पर नियंत्रित किए जाने और राज्यों में चुनावी अधिकारियों की पहुंच से जुड़े सवाल उठाए थे।
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। चुनाव आयोग ने अदालत को बताया है कि बड़ी संख्या में हटाए गए मतदाताओं ने बहाली के लिए अपील की है।
अरविंद केजरीवाल के बयान से बढ़ी राजनीतिक हलचल
SIR को लेकर अरविंद केजरीवाल की मांगों के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR समेत उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ऐसे में अरविंद केजरीवाल द्वारा उठाए गए सवाल और निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पक्ष के बीच अंतर इस पूरे विवाद का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है।
इस पूरे मामले में SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज को लेकर सामने आई अलग-अलग जानकारियों पर आगे की कानूनी और संस्थागत कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
For English News: http://newz24india.in
Visit WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Vb4ZuKSLSmbVWNb1sx1x



