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दवा घोटाले की जांच करने पर ACB चीफ का तबादला? सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल

दवा घोटाले की जांच के बीच ACB चीफ विक्रमजीत सिंह के तबादले पर सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाए और सरकार पर जांच प्रभावित करने का आरोप लगाया।

दिल्ली में सामने आए कथित दवा और चिकित्सा उपकरण खरीद मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) के प्रमुख और जॉइंट सीपी विक्रमजीत सिंह के कार्यकाल पूरा होने से पहले तबादले को लेकर सवाल खड़ा किया है। सौरभ भारद्वाज ने पूछा कि क्या दवा घोटाले की जांच आगे बढ़ाने की वजह से ही ACB प्रमुख का तबादला किया गया?

दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े इस मामले में दवाओं, मेडिकल उपकरणों और अन्य स्वास्थ्य सामग्री की खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ACB ने इस मामले में FIR दर्ज करने के बाद कई अधिकारियों और खरीद प्रक्रिया से जुड़े लोगों से पूछताछ की है।

ACB चीफ के तबादले पर उठाए सवाल

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि विक्रमजीत सिंह का कार्यकाल पूरा होने से पहले तबादला किया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई को दवा खरीद मामले की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।

AAP नेता ने आरोप लगाया कि जांच अगर आगे भी इसी तरह जारी रहती तो कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका सामने आ सकती थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और सरकार की ओर से इस विशेष दावे पर स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।

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650 करोड़ रुपये के कथित मामले का जिक्र

सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दवा और चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़े कथित 650 करोड़ रुपये के मामले का जिक्र किया। इस मामले में ACB की जांच के दौरान दवाओं, सर्जिकल सामग्री, अस्पताल के लिनेन और मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित अनियमितताओं की पड़ताल की जा रही है।

जांच से जुड़ी रिपोर्टों में कई वस्तुओं की कीमत बाजार दर से अधिक होने के आरोप सामने आए हैं। उदाहरण के तौर पर पोर्टेबल एक्स-रे मशीन और ORS की खरीद कीमतों को लेकर भी सवाल उठे हैं।

पोर्टेबल एक्स-रे और ORS की खरीद पर भी सवाल

सौरभ भारद्वाज ने अपने बयान में आरोप लगाया कि करीब 10 लाख रुपये की बताई जाने वाली पोर्टेबल एक्स-रे मशीन को 33 लाख रुपये में खरीदा गया। उन्होंने ORS की कीमत में भी कथित अंतर का मुद्दा उठाया।

मीडिया रिपोर्टों में भी ACB की FIR और जांच से जुड़े दस्तावेजों के हवाले से कुछ चिकित्सा सामान की खरीद में बाजार कीमतों और भुगतान की गई राशि के बीच अंतर का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन खरीद प्रक्रियाओं में अंतिम जिम्मेदारी और कथित वित्तीय नुकसान का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

राजीव रंगीला की भूमिका का भी जिक्र

AAP नेता ने कथित घोटाले में सप्लायर राजीव रंगीला की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया को कुछ कंपनियों के पक्ष में प्रभावित किया गया।

रिपोर्टों के मुताबिक, ACB ने भी मामले में राजीव रंगीला को आरोपी के तौर पर जांच के दायरे में रखा है और उसकी तलाश के लिए कानूनी कार्रवाई की गई है।

सरकार पर जांच को प्रभावित करने का आरोप

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि सरकार की ओर से जांच को सीमित रखने का दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि यदि मामले की गहराई से जांच होती है तो कई और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।

हालांकि, यह AAP नेता का राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध रिपोर्टों में दिल्ली सरकार और भाजपा की ओर से AAP के आरोपों को खारिज किए जाने की बात भी सामने आई है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने मामले में कार्रवाई को जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ाने की बात कही थी।

ACB की जांच में कई अधिकारी जांच के दायरे में

दवा खरीद मामले में ACB ने पूर्व DGHS प्रमुख डॉ. वत्सला अग्रवाल और डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार भी किया था। एजेंसी के मुताबिक, जांच में खरीद प्रक्रिया, टेंडर की शर्तों और तकनीकी मानकों में कथित हेरफेर की पड़ताल की जा रही है।

इस पूरे मामले में अब जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर नजर है। सौरभ भारद्वाज ने ACB प्रमुख के तबादले और कथित दवा घोटाले की जांच को लेकर सवाल उठाते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

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