यूनिसेफ: COVID-19 महामारी द्वारा टीकाकरण अभियान और टीकाकरण गतिविधियों में रुकावट के अलावा, इनमें से कई बच्चे दूरस्थ, नाजुक और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं, जिससे उन तक टीकों के साथ पहुंचना और भी मुश्किल हो जाता है। भारी संख्या में प्रवासी और शरणार्थी आबादी, टीकाकरण अभियानों की गुणवत्ता में विसंगतियां और टीकों के बारे में गलत जानकारी भी पोलियो उन्मूलन के प्रयासों में बाधा डालती है।

पोलियो अभियान में आयी कमी

हाल में जारी, यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक साल 1991 के बाद से खुराक में सबसे अधिक कमी आयी है। करीब 85 फीसदी के कुल कवरेज के लिहाज से देश का पोलियो टीकाकरण 2014 के स्तर पर चला गया।यूनिसेफ द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 2020 में देश में पोलियो टीकाकरण अभियान बुरी तरह प्रभावित हुआ क्योंकि सभी प्रमुख टीकाकरण अभियान का कवरेज काफी कम रहा है। देश में टीकाकरण कार्यक्रम के प्रभावित होने की प्रमुख वजहों में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है।

यूनिसेफ की रिपोर्ट यहां उपलब्ध है –

https://in.docworkspace.com/d/sIAWJtKx6say_jwY

पोलियो से संसार को कब मिलेगी निजात?

पोलियो, एक घातक वायरल बीमारी जो कभी दुनिया भर में बच्चों में पक्षाघात का प्रमुख कारण थी, लेकिन अब उन्मूलन के बहुत करीब है। 1988 के बाद से, पोलियो से प्रभावित बच्चों की संख्या में 99 प्रतिशत की कमी आई है – 125 देशों में 350,000 मामलों से, आज केवल दो देशों: अफगानिस्तान और पाकिस्तान में दो से भी कम मामलों में दर्ज किये गए हैं। नाइजीरिया को, अफ्रीकी क्षेत्रों के साथ 2020 में पोलियो वायरस से मुक्त घोषित किया जा चुका है हालांकि पोलियो का एक संक्रमण एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में फैल रहा है। पोलियो को पूरी तरह से खत्म करने के लिए हर घर के हर बच्चे को टीका जरूर लगवाना ज़रूरी है लेकिन हजारों बच्चे अभी भी पोलियो के टीके से वंचित हैं।

बता दें कि यूनिसेफ सालाना पोलियो टीकों की 1 अरब से अधिक खुराक की खरीद और वितरण का प्रबंधन करता है, जो वैश्विक मौखिक पोलियो टीकों (ओपीवी) के 50 प्रतिशत से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं। आज, नाइजीरिया में पोलियो अभियान में 99 प्रतिशत महिलाएं पाकिस्तान में 62 प्रतिशत और अफगानिस्तान में 43 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं ।पाकिस्तान और अफगानिस्तान में सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में, यूनिसेफ ने हाल ही में अपने पोलियो टीकाकरण अभियानों में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और पानी, स्वच्छता और स्वच्छता (WASH) सेवाओं को एकीकृत करने के लिए एक पहल शुरू की है।

दुनिया पोलियो उन्मूलन के अंतिम चरण में है। लेकिन व्यापक चुनौतियां इस चरण को अब तक का सबसे कठिन बना दिया है। भारत गैर कोविड टीके लगाने के मामले में पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका से भी पिछड़ा हुआ नजर आ रहा है।