नींद न आने की समस्या: थका हुआ शरीर और एक्टिव दिमाग? जानिए रात में क्यों बढ़ती है ओवरथिंकिंग
नींद न आने की समस्या और रात में थके होने के बावजूद दिमाग एक्टिव रहने का क्या है वैज्ञानिक कारण? जानिए डिफॉल्ट मोड नेटवर्क और ओवरथिंकिंग को रोकने के एक्सपर्ट टिप्स।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोगों की यह शिकायत रहती है कि दिनभर की थकान के बाद जब वे बिस्तर पर जाते हैं, तो शरीर साथ नहीं देता, लेकिन दिमाग शांत होने का नाम नहीं लेता। नींद न आने की समस्या और रात के सन्नाटे में शुरू होने वाली ओवरथिंकिंग न केवल आपकी रातों की नींद खराब करती है, बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति के पीछे हमारे दिमाग का एक खास नेटवर्क और लाइफस्टाइल से जुड़ी कई गलतियाँ जिम्मेदार हैं।
क्यों एक्टिव हो जाता है दिमाग का ‘डिफॉल्ट मोड नेटवर्क’?
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जब हम सोने की कोशिश करते हैं, तो हमारे दिमाग का एक हिस्सा जिसे ‘डिफॉल्ट मोड नेटवर्क’ (DMN) कहा जाता है, अधिक सक्रिय हो जाता है। यह हिस्सा आत्म-विश्लेषण और पुरानी यादों या भविष्य की चिंताओं को कुरेदने के लिए जिम्मेदार होता है। यही कारण है कि नींद न आने की समस्या से जूझ रहे लोगों को रात में पुराने विवाद, अधूरे काम या आने वाले कल का डर ज्यादा सताने लगता है।
तनाव और कॉर्टिसोल का खेल
आमतौर पर रात के समय शरीर को रिलैक्स होना चाहिए, लेकिन जो लोग मानसिक तनाव में रहते हैं, उनके शरीर में कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) का स्तर कम नहीं होता। जब शरीर में तनाव का स्तर बढ़ा रहता है, तो दिमाग को लगता है कि वह किसी खतरे में है। इस ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड की वजह से नींद न आने की समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि दिमाग सोने के बजाय सतर्क रहने को प्राथमिकता देता है।
केमिकल असंतुलन और इमोशनल कंट्रोल
अच्छी नींद के लिए मस्तिष्क के रसायनों (Neurotransmitters) का संतुलन अनिवार्य है। जब दिमाग को शांत करने वाले केमिकल्स कम हो जाते हैं और उत्तेजित करने वाले बढ़ जाते हैं, तो बेचैनी और तेज विचारों का दौर शुरू हो जाता है। नींद न आने की समस्या के कारण मस्तिष्क का वह हिस्सा भी प्रभावित होता है जो भावनाओं को नियंत्रित करता है, जिससे छोटी-सी चिंता भी रात के समय पहाड़ जैसी लगने लगती है।
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पाचन और खराब आदतों का असर
क्या आप जानते हैं कि आपके पेट और दिमाग के बीच गहरा संबंध है? एक्सपर्ट्स के अनुसार, खराब पाचन तंत्र भी नींद न आने की समस्या का एक बड़ा कारण हो सकता है। इसके अलावा, देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल करना, कैफीन का सेवन और सोने का कोई निश्चित समय न होना इस परेशानी को और गंभीर बना देता है। मोबाइल से निकलने वाली ‘ब्लू लाइट’ नींद के हार्मोन ‘मेलाटोनिन’ को बनने से रोकती है।
नींद न आने की समस्या से कैसे पाएं छुटकारा?
अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो एक्सपर्ट्स निम्नलिखित बदलावों की सलाह देते हैं:
डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बना लें।
निश्चित समय: रोज एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें।
मेडिटेशन: दिमाग को शांत करने के लिए गहरी सांस लेने वाले व्यायाम या ध्यान (Meditation) का सहारा लें।
हल्का भोजन: रात का खाना हल्का और सुपाच्य रखें ताकि पाचन तंत्र शांत रहे।
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