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बर्तन धोने का liquid खरीदने से पहले लेबल पर ये बातें ज़रूर पढ़ें

रोज़ इस्तेमाल होने वाला dishwash liquid सीधे हमारे हाथों और खाने के बर्तनों को छूता है। इसलिए बोतल की चमक और खुशबू से ज़्यादा ज़रूरी है उसके पीछे छपा लेबल।

ज़्यादातर घरों में बर्तन धोने का liquid उसी तरह खरीदा जाता है जैसे नमक या चीनी। दुकान पर जो ब्रांड दिख गया, या जिसकी खुशबू अच्छी लगी, वही ट्रॉली में चला जाता है। लेकिन यह वह उत्पाद है जो दिन में कई बार हमारी त्वचा के संपर्क में आता है और जिसकी हल्की सी परत, ठीक से न धुलने पर, थाली, कटोरी और बच्चों की बोतलों पर रह सकती है।

अच्छी बात यह है कि लेबल पढ़ना मुश्किल नहीं है। बस यह पता होना चाहिए कि किन शब्दों पर नज़र रखनी है।

सबसे पहले देखें: सर्फैक्टेंट किस तरह का है

किसी भी dishwash liquid का असली काम सर्फैक्टेंट करते हैं। यही वे तत्व हैं जो तेल और चिकनाई को पानी के साथ मिलाकर बर्तन से अलग करते हैं। झाग भी इन्हीं से बनता है।

लेबल पर अक्सर “anionic surfactants” या “non-ionic surfactants” जैसे शब्द लिखे होते हैं। कई कंपनियां यह भी बताती हैं कि उनके सर्फैक्टेंट पेट्रोलियम आधारित हैं या पौधों से बने हैं, जैसे नारियल या पाम से तैयार

किए गए। अगर लेबल पर सिर्फ “cleaning agents” लिखा है और कोई जानकारी नहीं है, तो कंपनी की वेबसाइट पर पूरी ingredient list देखना बेहतर रहता है।

एक बात याद रखें: ज़्यादा झाग का मतलब ज़्यादा सफ़ाई नहीं होता। कम झाग वाला लिक्विड भी चिकनाई अच्छी तरह हटा सकता है, और उसे धोकर निकालना भी आसान होता है।

खुशबू, रंग और प्रिज़र्वेटिव पर भी नज़र

नींबू या संतरे की महक बर्तन धोने को सुखद बना देती है, लेकिन लेबल पर “fragrance” या “parfum” लिखा हो तो यह समझना मुश्किल होता है कि उसमें असल में क्या है। जिन लोगों को तेज़ खुशबू से छींक, सिरदर्द या त्वचा में खुजली होती है, उन्हें हल्की या प्राकृतिक स्रोत से ली गई खुशबू वाले उत्पाद चुनने चाहिए।

इसी तरह प्रिज़र्वेटिव भी देखने लायक हैं। Parabens एक आम प्रिज़र्वेटिव समूह है, और बहुत से खरीदार अब ऐसे उत्पाद पसंद करते हैं जिन पर “paraben-free” साफ़ लिखा हो। गहरे हरे या पीले रंग वाले लिक्विड में अक्सर अलग से रंग मिलाया जाता है, जिसका सफ़ाई से कोई लेना-देना नहीं है।

लेबल पढ़ते समय ये बिंदु एक बार ज़रूर जांचें:

  • सर्फैक्टेंट का स्रोत क्या है, पौधों से बना या पेट्रोलियम आधारित
  • खुशबू किससे ली गई है, और क्या वह बहुत तेज़ है
  • क्या उत्पाद parabens और कठोर रसायनों से मुक्त होने की बात कहता है
  • क्या “biodegradable” लिखा है, और क्या पूरे फ़ॉर्मूले के लिए लिखा है
  • इस्तेमाल का तरीका और मात्रा, ताकि ज़रूरत से ज़्यादा लिक्विड न डालें
  • चेतावनी वाला हिस्सा, जैसे आंखों में जाने पर क्या करें

Biodegradable का दावा क्यों मायने रखता है

बर्तन धोने का पानी सीधे नाली में जाता है और वहां से आगे जल स्रोतों तक पहुंचता है। जो तत्व आसानी से टूटकर प्रकृति में घुल जाते हैं, उन्हें biodegradable कहा जाता है। लेबल पर यह शब्द दिखे तो ध्यान से पढ़ें कि दावा पूरे उत्पाद के लिए है या सिर्फ किसी एक हिस्से के लिए। साथ ही यह देखना भी उपयोगी है कि कंपनी ने अपने उत्पाद की जांच किसी स्वतंत्र लैब से करवाई है या नहीं।

बाज़ार में अब कई भारतीय ब्रांड इस दिशा में काम कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, गुरुग्राम की कंपनी Peels & Co का ऑरेंज स्पार्कल प्लांट-बेस्ड डिशवॉश लिक्विड नारियल और पाम आधारित सर्फैक्टेंट और citrus enzymes से बनाया गया है, जिसमें संतरे और नींबू की खुशबू है। कंपनी के अनुसार यह 100% biodegradable है, parabens और synthetic VOCs से मुक्त है और स्वतंत्र लैब में टेस्ट किया गया है।

हाथों का ख्याल और अच्छी तरह धोना

जो लोग रोज़ बहुत सारे बर्तन धोते हैं, उनके हाथ अक्सर रूखे हो जाते हैं या उंगलियों के आसपास की त्वचा फटने लगती है। ऐसे में ऐसा लिक्विड चुनें जो हाथों पर नरम होने का दावा करता हो, और ज़रूरत लगे तो दस्ताने पहनें। बर्तन धोने के बाद हाथों को साफ़ पानी से धोकर मॉइस्चराइज़र लगाना भी अच्छी आदत है।

सबसे अहम बात है rinse, यानी बर्तनों को साफ़ पानी से अच्छी तरह खंगालना। चाहे लिक्विड कितना भी हल्का हो, उसकी परत बर्तन पर नहीं रहनी चाहिए। खास तौर पर गिलास, बच्चों की बोतलें और प्लास्टिक के डिब्बे, जिन पर साबुन जल्दी टिकता है, उन्हें दो बार धोएं। लिक्विड को सीधे बर्तन पर डालने की बजाय पानी में घोलकर स्पंज से इस्तेमाल करें, इससे मात्रा भी कम लगती है और धोना भी आसान होता है।

अगर आप अलग-अलग विकल्प देखना चाहते हैं, तो पौधों से बने बर्तन धोने के लिक्विड की पूरी रेंज जैसे संग्रह में भी लेबल की जानकारी को इन्हीं बिंदुओं पर परखा जा सकता है।

आखिर में, कोई भी नया उत्पाद आज़माएं तो कुछ दिन देखें कि हाथों और बर्तनों पर उसका असर कैसा है। लेबल पढ़ने की यह छोटी सी आदत आपकी रसोई को ज़्यादा सुरक्षित और समझदार बना सकती है।

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