भारत

एसयू-57 लड़ाकू विमान, परमाणु संयंत्र और कच्चा तेल… पीएम मोदी-पुतिन बैठक का एजेंडा तय

पीएम मोदी-पुतिन बैठक में एसयू-57 लड़ाकू विमान, नए परमाणु संयंत्र, कच्चे तेल, यूक्रेन युद्ध और रूसी सेना में भारतीयों का मुद्दा उठ सकता है।

एसयू-57 लड़ाकू विमान: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राजधानी दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक होगी। पीएम मोदी-पुतिन बैठक में भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग, परमाणु ऊर्जा, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को स्पुतनिक इंडिया की ब्रीफिंग में पीएम मोदी-पुतिन बैठक के संभावित एजेंडे को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने और रूस के एसयू-57 लड़ाकू विमान से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।

एसयू-57 लड़ाकू विमान पर हो सकती है चर्चा

भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से मजबूत साझेदारी रही है। दोनों देशों के बीच सैन्य उपकरणों और रक्षा तकनीक को लेकर सहयोग लगातार जारी है। ऐसे में रूस के एसयू-57 लड़ाकू विमान का मुद्दा भी आगामी बैठक में अहम हो सकता है।

एसयू-57 रूस का उन्नत लड़ाकू विमान है। भारत और रूस के बीच इस विमान से जुड़े संभावित सहयोग को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। ऐसे में पीएम मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर बातचीत की उम्मीद है।

भारत में नए परमाणु संयंत्रों पर भी बातचीत

क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का मुद्दा भी दोनों नेताओं की बातचीत में शामिल हो सकता है।

भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार करने पर जोर दे रहा है। रूस इस क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर दोनों देशों के बीच सहमति बनने की संभावना है।

रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिकी शुल्क का मुद्दा

रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की ओर से प्रस्तावित 100 प्रतिशत शुल्क का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। दिमित्री पेस्कोव ने इस प्रस्ताव को अवैध और अस्वीकार्य बताया है।

भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद करता है। ऐसे में रूस से तेल खरीद और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे भी पीएम मोदी-पुतिन बैठक के दौरान चर्चा में आ सकते हैं।

यूक्रेन युद्ध पर भी होगी बातचीत

रूस-यूक्रेन युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान भी दोनों नेताओं की बातचीत का अहम हिस्सा हो सकता है। क्रेमलिन ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में भारत के योगदान की इच्छा का स्वागत किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दे चुके हैं। ऐसे में आगामी बैठक में इस मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच विचारों का आदान-प्रदान हो सकता है।

रूसी सेना में भारतीयों की भर्ती का मुद्दा

रूसी सेना में भारतीय नागरिकों के शामिल होने का मुद्दा भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। इस संबंध में पूछे गए सवाल पर दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि रूस में युद्ध क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सूची तैयार की जा रही है।

उन्होंने कहा कि ऐसे भारतीय नागरिकों को वापस भारत भेजने के लिए प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। यह मुद्दा भी दोनों देशों के बीच बातचीत में उठ सकता है।

also read:- बैंक कर्मचारियों के लिए PLI योजना पर सरकार का बड़ा फैसला,…

पीएम मोदी और पुतिन के रिश्तों पर क्या बोले पेस्कोव?

दिमित्री पेस्कोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रिश्तों को मजबूत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता दुनियाभर के महत्वपूर्ण मुद्दों पर लगातार संपर्क में रहते हैं।

पेस्कोव ने भारत को रूस का रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग भी लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी और पुतिन के बीच करीबी व्यक्तिगत संपर्क हैं और दोनों नेता संवेदनशील मुद्दों पर भी बातचीत करने में सक्षम हैं।

ब्रिक्स देशों में राष्ट्रीय मुद्राओं में बढ़ रहा कारोबार

क्रेमलिन प्रवक्ता ने ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि ब्रिक्स देशों के करीब 90 प्रतिशत लेनदेन अब राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहे हैं।

रूस ने ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहे भारत के प्रयासों की सराहना की है। रूस को उम्मीद है कि आगामी शिखर सम्मेलन से कई महत्वपूर्ण और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

11 से 13 सितंबर तक होगा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में 11 से 13 सितंबर तक किया जाएगा। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शीर्ष नेता हिस्सा लेंगे। इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत कर रहा है।

सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अन्य महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी।

ऐसे में पीएम मोदी-पुतिन बैठक को भारत और रूस के बीच रणनीतिक संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एसयू-57 लड़ाकू विमान, परमाणु ऊर्जा, कच्चे तेल का कारोबार, यूक्रेन युद्ध और रूसी सेना में मौजूद भारतीय नागरिकों की वापसी जैसे मुद्दे इस बैठक को खास बना सकते हैं।

For English Newshttp://newz24india.in

Related Articles

Back to top button